झारखंड में नगर निकायों के चुनाव में बज रहा सियासी परिवारवाद का डंका

Shashi Bhushan Kumar

झारखंड के 48 नगर निकायों में हो रहे चुनाव में राजनीतिक परिवारवाद का प्रभाव साफ नजर आ रहा है। विभिन्न दलों के कई वरिष्ठ नेताओं के परिजन चुनावी मैदान में हैं। प्रभावशाली नेताओं के पति-पत्नी, बेटे-बेटियां, बहुएं और भाई स्थानीय निकायों में नेतृत्व हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं।

इन निकायों के लिए 23 फरवरी को मतदान होना है, जिसके चलते पूरे राज्य में चुनावी गतिविधियां तेज हो गई हैं। धनबाद की मेयर सीट को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा बनी हुई है। यहां भाजपा विधायक रागिनी सिंह के पति संजीव सिंह निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में मैदान में हैं, जबकि भाजपा ने अलग प्रत्याशी उतारा है, जिससे मुकाबला रोचक बन गया है।

चास नगर निगम में भी राजनीतिक विरासत की झलक दिख रही है। पूर्व मंत्री स्वर्गीय समरेश सिंह की बड़ी बहू परिंदा सिंह चुनाव लड़ रही हैं, जबकि भाजपा की रितू रानी सिंह, अरविंद राय, कांग्रेस के पूर्व जिलाध्यक्ष उमेश गुप्ता और मो. सुल्तान जैसे उम्मीदवार भी मैदान में हैं। इससे मुकाबला बहुकोणीय हो गया है।

मानगो नगर निगम में भी पारिवारिक राजनीति हावी दिख रही है। पूर्व मंत्री बन्ना गुप्ता की पत्नी सुधा गुप्ता कांग्रेस समर्थित प्रत्याशी हैं, जबकि पूर्व भाजपा महानगर अध्यक्ष राजकुमार श्रीवास्तव की पत्नी कुमकुम श्रीवास्तव भी चुनाव लड़ रही हैं। यहां मुख्य मुकाबला दो राजनीतिक परिवारों के बीच माना जा रहा है।

चक्रधरपुर नगर परिषद अध्यक्ष पद के लिए सांसद जोबा मांझी के पुत्र उदय मांझी मैदान में हैं, जबकि विधायक दशरथ गगराई के भाई विजय गगराई भी उम्मीदवार हैं। जामताड़ा नगर पंचायत में पूर्व विधायक स्वर्गीय विष्णु भैया की पत्नी चमेली देवी अध्यक्ष पद की दावेदार हैं।

मेदिनीनगर नगर निगम में भी राजनीतिक विरासत दिख रही है। पूर्व मंत्री और कांग्रेस नेता केएन त्रिपाठी की बेटी नम्रता त्रिपाठी मेयर पद की उम्मीदवार हैं और उन्हें पार्टी का समर्थन प्राप्त है।

रांची में राज्यसभा सांसद महुआ मांझी के पुत्र सोमवित मांझी वार्ड काउंसलर का चुनाव लड़ रहे हैं और उनकी नजर डिप्टी मेयर पद पर बताई जा रही है। वहीं हजारीबाग के बरही में भाजपा विधायक मनोज यादव के भाई विकास यादव वार्ड काउंसलर पद पर निर्विरोध चुने जा चुके हैं और अब डिप्टी मेयर पद के संभावित दावेदार माने जा रहे हैं।

कुल मिलाकर, झारखंड के इन नगर निकाय चुनावों में स्थानीय मुद्दों के साथ-साथ राजनीतिक विरासत और पारिवारिक प्रभाव भी अहम भूमिका निभाते दिख रहे हैं।

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