राष्ट्रीय विज्ञान दिवस 2026: क्या है ‘रमन प्रभाव’, जिसने भारत को दिलाया पहला विज्ञान नोबेल

Shashi Bhushan Kumar

नई दिल्ली। भारत की वैज्ञानिक परंपरा ने विश्व को अनेक महान प्रतिभाएँ दी हैं। उन्हीं में से एक थे प्रख्यात भौतिक विज्ञानी सी. वी. रमन, जिनकी ऐतिहासिक खोज ‘रमन प्रभाव’ ने आधुनिक भौतिकी को नई दिशा दी। इसी उपलब्धि के सम्मान में भारत सरकार हर वर्ष 28 फरवरी को राष्ट्रीय विज्ञान दिवस मनाती है। वर्ष 1930 में इसी खोज के लिए उन्हें भौतिकी का नोबेल पुरस्कार प्रदान किया गया था — विज्ञान के क्षेत्र में किसी भारतीय को मिला पहला नोबेल सम्मान।

रमन प्रभाव प्रकाश के प्रकीर्णन (Scattering of Light) से जुड़ा एक महत्वपूर्ण वैज्ञानिक सिद्धांत है। जब प्रकाश की किरण किसी पारदर्शी माध्यम — जैसे ठोस, द्रव या गैस — से होकर गुजरती है, तो उसका एक छोटा हिस्सा उस माध्यम के अणुओं से टकराकर बिखर जाता है।

इस टकराव के दौरान प्रकाश की ऊर्जा और तरंगदैर्ध्य (wavelength) में सूक्ष्म परिवर्तन होता है। परिणामस्वरूप प्रकाश के रंग में हल्का बदलाव दिखाई देता है। यह परिवर्तन सामान्य आँख से स्पष्ट नहीं दिखता, लेकिन वैज्ञानिक उपकरणों की सहायता से इसे मापा जा सकता है।

सरल उदाहरण के रूप में इसे ऐसे समझा जा सकता है जैसे कैरम की गोटी स्ट्राइकर से टकराने पर दिशा बदलती है। उसी प्रकार प्रकाश भी अणुओं से टकराकर अपनी विशेषताओं में बदलाव दिखाता है। यदि ऊर्जा बढ़ती है तो तरंगदैर्ध्य कम हो जाती है, और यदि ऊर्जा घटती है तो तरंगदैर्ध्य बढ़ जाती है।

यही सूक्ष्म परिवर्तन पदार्थ की आंतरिक संरचना के बारे में महत्वपूर्ण जानकारी देता है।

रमन प्रभाव ने वैज्ञानिकों को पदार्थ की संरचना को समझने का नया दृष्टिकोण दिया। इसी सिद्धांत पर आधारित ‘रमन स्पेक्ट्रोस्कोपी’ तकनीक आज विभिन्न क्षेत्रों में उपयोग की जा रही है।

प्रकाश के व्यवहार की गहन समझ ने आधुनिक तकनीक, चिकित्सा अनुसंधान और अंतरिक्ष विज्ञान के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस वर्ष राष्ट्रीय विज्ञान दिवस की थीम है — “विज्ञान में महिलाएं: विकसित भारत की उत्प्रेरक।” इस थीम के माध्यम से विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका को रेखांकित किया जा रहा है। देशभर के शैक्षणिक संस्थानों और अनुसंधान केंद्रों में विज्ञान संचार कार्यक्रम, प्रदर्शनियां और कार्यशालाएं आयोजित की जा रही हैं, जिनका उद्देश्य युवा पीढ़ी — विशेषकर बालिकाओं — को विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित करना है।

‘रमन प्रभाव’ केवल एक वैज्ञानिक सिद्धांत नहीं, बल्कि भारतीय विज्ञान की वैश्विक पहचान का प्रतीक है। यह खोज इस बात का प्रमाण है कि जिज्ञासा, शोध और समर्पण से सीमित संसाधनों में भी विश्वस्तरीय उपलब्धियां हासिल की जा सकती हैं।

राष्ट्रीय विज्ञान दिवस हमें न केवल अतीत की इस ऐतिहासिक उपलब्धि को याद करने का अवसर देता है, बल्कि वैज्ञानिक सोच को समाज में मजबूत करने और नई पीढ़ी को नवाचार की दिशा में प्रेरित करने का संदेश भी देता है।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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