मनी लॉन्ड्रिंग जांच तेज: इंदौर निगम अधिकारी की करोड़ों की संपत्ति अटैच

Shashi Bhushan Kumar

इंदौर: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की इंदौर इकाई ने मनी लॉन्ड्रिंग रोकथाम अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के तहत कार्रवाई करते हुए इंदौर नगर निगम के सहायक राजस्व अधिकारी राजेश परमार और उनके परिवार से जुड़ी करीब 1.06 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से कुर्क कर लिया है। यह कदम आय से अधिक संपत्ति के आरोपों के तहत उठाया गया है।

ईडी द्वारा जब्त की गई संपत्तियों में एक आवासीय मकान, एक फ्लैट, कई भूखंड और कृषि भूमि शामिल हैं, जो राजेश परमार और उनके परिजनों के नाम पर दर्ज हैं।

यह जांच भोपाल की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) द्वारा दर्ज एफआईआर के आधार पर शुरू की गई थी। एफआईआर भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 की धारा 7 और 13(1)(बी) सहपठित धारा 13(2) के तहत दर्ज की गई थी। आरोप है कि राजेश परमार ने अपने पद का दुरुपयोग कर अपनी वैध आय से अधिक संपत्ति अर्जित की।

जांच में पाया गया कि 2007 से 2022 के बीच लगभग 1.66 करोड़ रुपये की संपत्तियां खरीदी गईं, जो उनकी ज्ञात आय से करीब 175 प्रतिशत अधिक थीं। ईडी ने अवैध धन का अनुमान लगभग 1.21 करोड़ रुपये लगाया है।

जांच में यह भी सामने आया कि अवैध रूप से अर्जित धन का इस्तेमाल सीधे संपत्तियां खरीदने में किया गया। साथ ही, राजेश परमार और उनके परिवार के बैंक खातों में बड़ी मात्रा में नकद जमा किए गए, ताकि धन के वास्तविक स्रोत को छिपाया जा सके। बाद में इस रकम को विभिन्न खातों में ट्रांसफर कर संपत्ति खरीदने में इस्तेमाल किया गया।

पीएमएलए के तहत पूछताछ में राजेश परमार इस धन के वैध स्रोत के संबंध में कोई ठोस दस्तावेज या संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सके। ईडी ने बताया कि मामले में जांच अभी जारी है।

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