SIR को लेकर बंगाल में सियासी घमासान, ममता बनर्जी ने केंद्र पर लगाए गंभीर आरोप

Ravikant Upadhyay

पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआइआर) को लेकर सियासत तेज हो गई है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने गुरुवार को एक सनसनीखेज दावा करते हुए कहा कि यदि उनकी सरकार ने जबरन एसआइआर की प्रक्रिया रोकने की कोशिश की होती, तो केंद्र सरकार यहां विधानसभा चुनाव कराने के बजाय सीधे राष्ट्रपति शासन लागू करवा देती। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी सरकार गृह मंत्री अमित शाह की “चालाकी” में नहीं फंसी।

मुर्शिदाबाद में आयोजित एसआइआर विरोधी रैली को संबोधित करते हुए ममता बनर्जी ने कहा कि भाजपा एसआइआर के बहाने बंगाल में डिटेंशन कैंप खोलना चाहती है, जिसे वह किसी भी हाल में सफल नहीं होने देंगी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा,
“बंगाल में किसी भी सूरत में राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) लागू नहीं होने दिया जाएगा।”

मुख्यमंत्री ने भाजपा पर अल्पसंख्यकों, मतुआ समुदाय और राजवंशियों को बेदखल करने की साजिश रचने का आरोप लगाया। उन्होंने सवाल उठाया कि एसआइआर केवल बंगाल जैसे गैर-भाजपा शासित राज्यों में ही क्यों हो रहा है, जबकि सीमावर्ती भाजपा शासित राज्यों में इस तरह की कवायद क्यों नहीं की जा रही। ममता बनर्जी ने कहा कि रोहिंग्या बंगाल में नहीं, बल्कि भाजपा शासित राज्यों में रह रहे हैं, इसके बावजूद बदनामी बंगाल की हो रही है।

मुख्यमंत्री ने यह भी खुलासा किया कि उन्होंने अब तक एसआइआर के तहत दिया गया गणना प्रपत्र खुद नहीं भरा है। उनका कहना है कि जब तक राज्य के सभी नागरिकों के गणना प्रपत्र नहीं भरे जाते, तब तक वह भी इसे नहीं भरेंगी। उन्होंने इसे जनता के साथ एकजुटता का संकेत बताया।

दूसरी ओर, भाजपा ने इस पूरे मुद्दे पर निर्वाचन आयोग से सख्त निगरानी की मांग की है। पार्टी ने आग्रह किया है कि एसआइआर प्रक्रिया को निष्पक्ष और पारदर्शी बनाने के लिए केंद्र सरकार के कर्मचारियों को सूक्ष्म पर्यवेक्षक नियुक्त किया जाए। भाजपा का कहना है कि इससे यह सुनिश्चित होगा कि अंतिम मतदाता सूची किसी भी तरह की हेराफेरी से मुक्त रहे।

बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष सुवेंदु अधिकारी ने भी निर्वाचन आयोग को पत्र भेजकर मांग की है कि एसआइआर के दौरान होने वाली जांच और सुनवाई की निगरानी सीसीटीवी कैमरों से कराई जाए और उसकी फुटेज प्रक्रिया पूरी होने तक सुरक्षित रखी जाए।

इधर, गुरुवार को राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के सामने तृणमूल समर्थित बीएलओ अधिकार रक्षा समिति के सदस्य प्रदर्शन पर उतर आए। प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़कर सीईओ कार्यालय में घुसने की कोशिश की, जिस दौरान पुलिस के साथ उनकी धक्का-मुक्की भी हुई।

इस बीच चुनाव आयोग ने बड़ा खुलासा करते हुए बताया है कि अब तक मतदाता सूची से 50 लाख लोगों के नाम कटने का हिसाब मिला है। यह आंकड़ा बीएलओ से प्राप्त प्रारंभिक जानकारी के आधार पर सामने आया है। हालांकि, इसे लेकर अभी अंतिम पुष्टि बाकी है।

एसआइआर और एनआरसी को लेकर बंगाल में सियासी तापमान लगातार बढ़ता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह मुद्दा राज्य की राजनीति और आगामी चुनावों को गहराई से प्रभावित कर सकता है।

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