गांधीनगर की एक स्थानीय अदालत ने अदाणी एंटरप्राइजेज लिमिटेड (एईएल) से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में पत्रकार रवि नायर को दोषी ठहराते हुए एक साल की कैद और जुर्माने की सजा सुनाई है।
यह मामला एईएल द्वारा दायर शिकायत पर आधारित था, जिसमें कंपनी ने आरोप लगाया था कि रवि नायर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर कई ऐसे पोस्ट साझा किए जो कथित तौर पर भ्रामक और मानहानिकारक थे। कंपनी का कहना था कि इन पोस्टों से अदाणी समूह की छवि को नुकसान पहुंचाने की कोशिश की गई।
एईएल की कानूनी टीम ने अदालत में दलील दी कि संबंधित ट्वीट्स न तो निष्पक्ष आलोचना के दायरे में आते हैं और न ही वैध टिप्पणी माने जा सकते हैं, बल्कि इन्हें कंपनी की साख को कमजोर करने के उद्देश्य से प्रसारित किया गया।
मामले की सुनवाई के बाद मनसा मजिस्ट्रेट कोर्ट ने पाया कि एईएल अपने आरोप साबित करने में सफल रहा है। इसके आधार पर अदालत ने रवि नायर को आपराधिक मानहानि का दोषी करार दिया और एक साल की सजा के साथ आर्थिक दंड भी लगाया।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, यह फैसला सार्वजनिक विमर्श में जिम्मेदारी और जवाबदेही की जरूरत को रेखांकित करता है। एक वरिष्ठ वकील ने कहा कि अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का अधिकार किसी व्यक्ति या संस्था की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाने की छूट नहीं देता।
उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के 2016 के सुब्रमण्यम स्वामी बनाम भारत संघ मामले का हवाला देते हुए कहा कि प्रतिष्ठा को भी मौलिक अधिकार माना गया है और मानहानि, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर वैध प्रतिबंधों में शामिल है।
वकील ने यह भी कहा कि बिना ठोस प्रमाण के बार-बार आरोप लगाना “मीडिया ट्रायल” के समान है, जिस पर अदालतें पहले भी चिंता जता चुकी हैं। उन्होंने हिंडनबर्ग से जुड़े मामलों का भी उल्लेख किया, जिनकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा जांच कराई गई थी, ताकि झूठे दावों से होने वाले संभावित नुकसान को समझा जा सके।

