बायो-मेडिकल कचरा प्रबंधन पर झारखंड हाईकोर्ट के जारी किया 19 बिंदुओं में निर्देश, 14 साल पुरानी पीआईएल का निपटारा

Shashi Bhushan Kumar

राज्य में बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स, 2016 के सख्त पालन को सुनिश्चित करने के लिए झारखंड हाईकोर्ट ने 19 बिंदुओं में विस्तृत निर्देश जारी किए हैं। साथ ही वर्ष 2012 से लंबित जनहित याचिका का निपटारा कर दिया गया।

मुख्य न्यायाधीश एम.एस. सोनक और न्यायमूर्ति राजेश शंकर की पीठ ने राज्य सरकार को 30 दिनों के भीतर सचिव स्तर के एक नोडल अधिकारी की नियुक्ति करने का आदेश दिया। यह अधिकारी विभिन्न विभागों के बीच समन्वय स्थापित कर बायो-मेडिकल कचरे के प्रबंधन की निगरानी करेंगे।

अदालत ने झारखंड राज्य प्रदूषण नियंत्रण पर्षद को निर्देश दिया कि वह सभी जिलों के अस्पतालों और अधिकृत कॉमन बायो-मेडिकल वेस्ट ट्रीटमेंट प्लांट की अद्यतन सूची तैयार रखे। कचरे की उत्पत्ति से अंतिम निस्तारण तक बारकोड आधारित डिजिटल ट्रैकिंग प्रणाली लागू करने को भी कहा गया है।

नियमों के पालन की जांच के लिए नियमित और औचक निरीक्षण करने के निर्देश दिए गए हैं। उल्लंघन की स्थिति में पर्यावरण संरक्षण अधिनियम, 1986 के तहत सख्त कार्रवाई की चेतावनी दी गई है। जिलों के उपायुक्तों को सुनिश्चित करना होगा कि अस्पतालों का कचरा सामान्य शहरी कचरे में न मिले।

30 से अधिक बिस्तरों वाले अस्पतालों में बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट कमेटी का गठन अनिवार्य किया गया है, जबकि छोटे अस्पतालों को एक जिम्मेदार अधिकारी नामित कर उसका संपर्क विवरण सार्वजनिक करना होगा।

यह मामला वर्ष 2012 में रांची, धनबाद और जमशेदपुर में संक्रमित चिकित्सा कचरा खुले में फेंके जाने के आरोपों के बाद दायर जनहित याचिका से जुड़ा था। अदालत ने माना कि पिछले वर्षों में निगरानी के कारण राज्य में बुनियादी ढांचे में सुधार हुआ है और कई ट्रीटमेंट प्लांट अब संचालित हो रहे हैं।

अदालत ने स्पष्ट किया कि स्वच्छ पर्यावरण का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 से जुड़ा है। हालांकि अब निरंतर न्यायिक निगरानी की आवश्यकता नहीं है, लेकिन भविष्य में किसी भी उल्लंघन की स्थिति में संबंधित पक्ष विधिक उपाय अपना सकते हैं।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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