झारखंड सरकार पर धार्मिक पक्षपात का आरोप, प्रतुल शाह देव का तीखा बयान

Shashi Bhushan Kumar

भाजपा के प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने झारखंड सरकार द्वारा पेसा कानून को लेकर जारी अधिसूचना पर तीखी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने इस अधिसूचना को आदिवासी समाज की परंपरागत संस्कृति के मूल स्वरूप पर आघात बताया। उनका आरोप है कि सरकार का यह कदम दर्शाता है कि वह कुछ खास धार्मिक समूहों के दबाव में निर्णय ले रही है।

शनिवार को समाचार एजेंसी से बातचीत में प्रतुल शाह देव ने कहा कि पेसा कानून से जुड़ी अधिसूचना यह संकेत देती है कि सरकार आदिवासी समाज की मूल पहचान की अनदेखी कर रही है। उनके अनुसार, सरकार ऐसे फैसले ले रही है जिससे आदिवासी समुदाय की परंपराओं और सामाजिक ढांचे को कमजोर किया जा रहा है।

भाजपा प्रवक्ता का कहना था कि अधिसूचना में किए गए प्रावधानों के अनुसार अब ईसाई धर्म से जुड़े व्यक्ति भी ग्राम प्रधान के चुनाव में भाग ले सकते हैं। उन्होंने इसे आदिवासी समाज की पारंपरिक व्यवस्था में हस्तक्षेप करार दिया और कहा कि यह फैसला किसी भी सूरत में स्वीकार्य नहीं है। उनका आरोप है कि सरकार परोक्ष रूप से आदिवासी समाज की संस्कृति पर चोट कर रही है।

प्रतुल शाह देव ने यह भी कहा कि पेसा कानून में यह स्पष्ट किया गया है कि धर्म परिवर्तन कर चुके आदिवासियों को मिलने वाले लाभों में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा। उनके मुताबिक, इससे यह संदेश जाता है कि सरकार आदिवासी हितों की तुलना में अन्य वर्गों को प्राथमिकता दे रही है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है।

उन्होंने चर्चों में आदिवासी परंपराओं को अपनाने के प्रयासों पर भी सवाल उठाते हुए कहा कि यह सब मूल आदिवासी संस्कृति को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा है। प्रतुल शाह देव ने दावा किया कि इन गतिविधियों का उद्देश्य केवल राजनीतिक लाभ हासिल करना है, लेकिन इससे किसी को कोई फायदा नहीं होगा क्योंकि जनता सब कुछ समझती है।

उन्होंने केंद्र और राज्य सरकारों पर आदिवासी अधिकारों के हनन का आरोप लगाते हुए कहा कि ऐसे प्रयासों का विरोध किया जाएगा।

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ प्रमुख मोहन भागवत के हालिया बयान का समर्थन करते हुए प्रतुल शाह देव ने कहा कि संघ को किसी राजनीतिक दल के नजरिये से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ एक सामाजिक संगठन है, जिसने अपने सौ वर्षों के सफर में समाज सेवा और सांस्कृतिक मूल्यों को प्राथमिकता दी है।

भाजपा प्रवक्ता ने कहा कि संघ, भाजपा से पहले अस्तित्व में आया और दोनों की तुलना करना उचित नहीं है। हालांकि उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि भाजपा कार्यकर्ताओं ने संघ से संगठन और राजनीति के मूल सिद्धांत सीखे हैं। उनके अनुसार, संघ भाजपा के लिए एक वैचारिक आधार रहा है।

इसके अलावा प्रतुल शाह देव ने समाजवादी पार्टी पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि मौजूदा समय में समाजवादी पार्टी जनता का भरोसा खो चुकी है और सत्ता में वापसी के लिए युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रही है।

उन्होंने दावा किया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में देश में विकास कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं और युवा वर्ग इस सच्चाई को समझ रहा है। ऐसे में विपक्षी दलों के प्रयास सफल नहीं होंगे।

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