झारखंड विधानसभा: सीएम हेमंत सोरेन ने राज्य में अंगदान पर प्रभावी कानून बनाने की घोषणा की

Shashi Bhushan Kumar

झारखंड विधानसभा में बजट सत्र के दौरान मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने राज्य में अंगदान को बढ़ावा देने के लिए प्रभावी कानून बनाने की घोषणा की। राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि केंद्र स्तर पर कानून और नीतियां मौजूद होने के बावजूद जमीनी स्तर पर अपेक्षित परिणाम नहीं मिल पा रहे हैं। इसलिए राज्य सरकार मजबूत कानूनी ढांचा तैयार करने के साथ व्यापक जन-जागरूकता अभियान भी चलाएगी, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर अंग उपलब्ध हो सके।

मुख्यमंत्री ने केरल की 10 माह की बच्ची आलिन शेरिन अब्राहम के अंगदान का उल्लेख करते हुए इसे मानवता का प्रेरक उदाहरण बताया। उन्होंने कहा कि किसी की जान बचाने के मामले में धर्म और जाति जैसी सीमाएं महत्वहीन हो जाती हैं। राज्य सरकार इस दिशा में ठोस पहल करेगी।

हेमंत सोरेन ने वर्ष 2050 तक झारखंड को देश के अग्रणी राज्यों में शामिल करने का लक्ष्य दोहराया और कहा कि अंगदान पर प्रस्तावित कानून इसी दीर्घकालिक विकास दृष्टि का हिस्सा है। उन्होंने यह भी कहा कि झारखंड के 25 वर्षों के बजट सत्र के इतिहास में पहली बार राज्यपाल के अभिभाषण पर विपक्ष की ओर से कोई संशोधन प्रस्ताव नहीं आया, जो सरकार के कामकाज पर अप्रत्यक्ष सहमति को दर्शाता है।

मुख्यमंत्री के भाषण के दौरान प्रमुख विपक्षी दल भाजपा के विधायकों ने सदन का बहिष्कार किया। इस पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि सरकार धरातल पर काम कर रही है और उसकी उपलब्धियां जनता को दिख रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि अब झारखंड अन्य राज्यों के मॉडल अपनाने के बजाय अपनी योजनाओं से पहचान बना रहा है।

सीएम ने सामाजिक सुरक्षा, शिक्षा और स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने की प्रतिबद्धता दोहराई। साथ ही, देश में बढ़ते कर्ज, केंद्र की धान क्रय नीति और जेपीएससी की उम्र सीमा जैसे मुद्दों पर भी अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि सरकार इन विषयों पर गंभीरता से विचार कर रही है और सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

Share This Article
शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
Leave a Comment