जमशेदपुर में अवैध निर्माण पर हाईकोर्ट सख्त, 24 इमारतें एक महीने में ध्वस्त करने का आदेश

Ravikant Upadhyay

झारखंड हाईकोर्ट ने जमशेदपुर में बढ़ते अवैध निर्माण और अतिक्रमण के मामलों को गंभीरता से लेते हुए कड़ा रुख अपनाया है। चीफ जस्टिस एम.एस. सोनक और जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद की खंडपीठ ने जमशेदपुर नोटिफाइड एरिया कमेटी (JNAC) को शहर में चिन्हित अवैध निर्माणों पर तत्काल और निर्णायक कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि जमशेदपुर के विभिन्न इलाकों में स्थित 24 प्रमुख अवैध इमारतों को एक महीने के भीतर ध्वस्त किया जाए।

हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि जिन भवनों का निर्माण स्वीकृत नक्शे के विपरीत किया गया है या जो बिना किसी वैध अनुमति के खड़े किए गए हैं, उनके अवैध हिस्सों को किसी भी स्थिति में हटाया जाना चाहिए। अदालत ने इस मामले में जिम्मेदारी तय करते हुए JNAC के डिप्टी म्युनिसिपल कमिश्नर को व्यक्तिगत रूप से आदेश के अनुपालन की निगरानी करने को कहा है। कोर्ट ने यह भी चेतावनी दी है कि यदि आदेश के क्रियान्वयन में किसी भी तरह की लापरवाही या देरी हुई, तो इसे अदालत की अवमानना माना जाएगा और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जा सकती है।

अदालत ने राज्य सरकार को भी इस कार्रवाई में पूर्ण सहयोग देने के निर्देश दिए हैं। नगर विकास सचिव, जमशेदपुर के उपायुक्त (DC) और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को आदेश दिया गया है कि ध्वस्तीकरण अभियान के दौरान पर्याप्त पुलिस बल और प्रशासनिक सहायता उपलब्ध कराई जाए, ताकि किसी प्रकार की कानून-व्यवस्था की समस्या उत्पन्न न हो। कोर्ट ने साफ कहा है कि अवैध निर्माण हटाने की प्रक्रिया में किसी तरह का दबाव, राजनीतिक हस्तक्षेप या टालमटोल बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

महत्वपूर्ण रूप से, हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़े अपने पूर्व के उन सभी अंतरिम आदेशों को भी रद्द कर दिया है, जिनके कारण अब तक अवैध निर्माणों पर कार्रवाई रुकी हुई थी। इन अंतरिम आदेशों के हटने के बाद अब प्रशासन के लिए कानूनी रूप से पूरी तरह रास्ता साफ हो गया है और JNAC बिना किसी बाधा के बुलडोजर कार्रवाई कर सकता है।

कोर्ट ने यह भी टिप्पणी की कि अवैध निर्माण न केवल शहर की नियोजित विकास व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं, बल्कि आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए भी खतरा बनते हैं। बिना मानकों के बनी इमारतें भविष्य में बड़े हादसों को जन्म दे सकती हैं। ऐसे में प्रशासन का कर्तव्य है कि समय रहते सख्त कदम उठाए जाएं।

हाईकोर्ट के इस फैसले को जमशेदपुर में शहरी विकास और कानून व्यवस्था के लिहाज से एक बड़ा कदम माना जा रहा है। माना जा रहा है कि इस आदेश के बाद शहर में अवैध निर्माण करने वालों में हड़कंप मच गया है। साथ ही, यह फैसला राज्य के अन्य शहरों के लिए भी एक सख्त संदेश है कि अवैध निर्माण और अतिक्रमण के खिलाफ अब किसी तरह की नरमी नहीं बरती जाएगी।

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