जम्मू-कश्मीर में महसूस किए गए भूकंप के झटके, तीव्रता 5.3, केंद्र ताजिकिस्तान में

Ravikant Upadhyay

जम्मू-कश्मीर में शुक्रवार तड़के भूकंप के झटकों से लोगों में दहशत फैल गई। हालांकि राहत की बात यह रही कि इस प्राकृतिक घटना में अब तक किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की कोई सूचना सामने नहीं आई है। रिक्टर स्केल पर भूकंप की तीव्रता 5.3 मापी गई है और इसका केंद्र मध्य एशिया के देश ताजिकिस्तान में स्थित था।

स्थानीय मौसम विभाग के निदेशक मुख्तार अहमद ने समाचार एजेंसी आईएएनएस को जानकारी देते हुए बताया कि यह भूकंप गुरुवार और शुक्रवार की दरम्यानी रात करीब 2 बजकर 44 मिनट पर आया। भूकंप का केंद्र धरती की सतह से लगभग 110 किलोमीटर नीचे था। इसके भौगोलिक निर्देशांक 38.26 डिग्री उत्तरी अक्षांश और 73.42 डिग्री पूर्वी देशांतर दर्ज किए गए हैं। ताजिकिस्तान में केंद्र होने के बावजूद इसके झटके जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में महसूस किए गए।

कश्मीर घाटी के गांदरबल जिले के कुछ हिस्सों में रहने वाले लोगों ने बताया कि वे गहरी नींद में थे, तभी अचानक रसोई में रखे बर्तनों की खड़खड़ाहट से उनकी नींद खुल गई। जब उन्होंने घर से बाहर निकलकर आसपास के लोगों से बातचीत की, तब उन्हें पता चला कि यह भूकंप के झटकों का असर था। कई इलाकों में लोग एहतियातन अपने घरों से बाहर निकल आए, हालांकि कुछ ही देर बाद स्थिति सामान्य हो गई।

प्रशासन और आपदा प्रबंधन विभाग ने स्थिति पर नजर बनाए रखी है। अधिकारियों के अनुसार फिलहाल किसी भी तरह के नुकसान की सूचना नहीं है और न ही कहीं से हताहत होने की खबर मिली है। फिर भी संवेदनशील क्षेत्रों में निगरानी बढ़ा दी गई है ताकि किसी आपात स्थिति से तुरंत निपटा जा सके।

गौरतलब है कि कश्मीर घाटी भूकंपीय दृष्टि से अत्यंत संवेदनशील क्षेत्र में स्थित है। इतिहास गवाह है कि यहां समय-समय पर आए भूकंपों ने भारी तबाही मचाई है। सबसे विनाशकारी भूकंप 8 अक्टूबर 2005 को आया था, जिसकी तीव्रता रिक्टर स्केल पर 7.6 थी। उस भूकंप का केंद्र पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर के मुजफ्फराबाद के पास था। इस भयावह भूकंप में 80 हजार से अधिक लोगों की जान चली गई थी और मुजफ्फराबाद शहर पूरी तरह तबाह हो गया था। जम्मू-कश्मीर में भी हजारों इमारतें क्षतिग्रस्त हो गई थीं और लगभग एक महीने तक लगातार झटके महसूस किए गए थे।

इतिहास में झांकें तो कश्मीर घाटी में 1555 में 7.6 तीव्रता, 1669 में 7 तीव्रता, 1779 और 1885 में 7.5 तीव्रता के भूकंप दर्ज किए गए हैं। विशेष रूप से 30 मई 1885 को आया बारामूला भूकंप अत्यंत विनाशकारी साबित हुआ था, जिसकी अनुमानित तीव्रता 6.3 से 6.8 के बीच थी। इस भूकंप में कम से कम 3,081 लोगों की मौत हुई थी और श्रीनगर समेत आसपास के क्षेत्रों में भारी नुकसान हुआ था।

विशेषज्ञों का मानना है कि कश्मीर जैसे भूकंप संभावित क्षेत्रों में सतर्कता और आपदा प्रबंधन की तैयारी बेहद जरूरी है। शुक्रवार तड़के आए भूकंप ने एक बार फिर इस क्षेत्र की संवेदनशीलता को उजागर किया है, हालांकि इस बार बड़ा नुकसान टल जाना राहत की बात है।

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