नई दिल्ली, 1 जनवरी | भारत और मालदीव के बीच द्विपक्षीय व्यापार संबंधों ने बीते आठ वर्षों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की है। इस अवधि में दोनों देशों के बीच व्यापार लगभग तीन गुना बढ़ गया है, जो मजबूत होते कूटनीतिक, आर्थिक और रणनीतिक रिश्तों का स्पष्ट संकेत है। वित्त वर्ष 2024-25 में भारत का मालदीव को निर्यात दोगुना होकर 680 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया है, जबकि मालदीव से भारत का आयात करीब 20 गुना बढ़कर 119 मिलियन डॉलर हो गया है।
विशेषज्ञों के अनुसार, दोनों देशों के बीच बढ़ती आर्थिक साझेदारी में पर्यटन की भूमिका बेहद अहम रही है। बड़ी संख्या में भारतीय पर्यटक मालदीव का रुख करते हैं, जिससे न केवल मालदीव की पर्यटन आधारित अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है, बल्कि दोनों देशों के बीच पारस्परिक निर्भरता भी लगातार बढ़ रही है।
मालदीव इनसाइट समाचार पोर्टल में प्रकाशित एक हालिया लेख के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की हाल की मालदीव यात्रा के बाद भारत–मालदीव संबंधों को एक नई दिशा मिली है। इस दौरान दोनों देशों के बीच आठ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए, जो आने वाले वर्षों में सहयोग को और गहरा करेंगे। इन समझौतों में ऋण राहत का प्रावधान भी शामिल है, जिससे मालदीव पर वार्षिक ऋण चुकौती का बोझ लगभग 40 प्रतिशत तक कम होने की उम्मीद है।
इन समझौतों के तहत बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 565 मिलियन डॉलर की क्रेडिट लाइन, यूपीआई–रुपे प्रणाली का एकीकरण, मत्स्य पालन क्षेत्र में सहयोग, आवास परियोजनाएं, सुरक्षा सहायता, जलवायु परिवर्तन से निपटने के उपाय तथा मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) और द्विपक्षीय निवेश संधि पर बातचीत को आगे बढ़ाने जैसे अहम बिंदु शामिल हैं।
रिपोर्ट में बताया गया है कि भारत से मालदीव को निर्यात की जाने वाली वस्तुएं वहां की अर्थव्यवस्था के लिए अत्यंत आवश्यक हैं। इनमें पेट्रोलियम उत्पाद, दवाइयां, चावल, फल और सब्जियां जैसे खाद्य पदार्थ प्रमुख हैं। इसके अलावा मशीनरी, विद्युत उपकरण और परिवहन वाहनों का निर्यात मालदीव में उपभोक्ताओं की बढ़ती मांग को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है।
हालांकि मूल्य के लिहाज से मालदीव से भारत का आयात अपेक्षाकृत कम है, लेकिन इसका रणनीतिक और आर्थिक महत्व कम नहीं है। भारत मुख्य रूप से मछली और अन्य समुद्री उत्पाद मालदीव से आयात करता है, जो दोनों देशों के मत्स्य उद्योग के बीच सहयोग को दर्शाता है।
लेख में यह भी उल्लेख किया गया है कि पर्यटन भारत और मालदीव के बीच सबसे मजबूत और जीवंत सेतु बना हुआ है। मालदीव में पर्यटकों के आगमन के मामले में भारत लगातार शीर्ष देशों में शामिल रहा है, जिससे खासकर उस समय अर्थव्यवस्था को स्थिरता मिलती है जब यूरोप या पूर्वी एशिया से आने वाले पर्यटकों की संख्या में उतार-चढ़ाव होता है।
कुल मिलाकर, भारत–मालदीव संबंध अब केवल पड़ोसी देशों तक सीमित न रहकर एक परिपक्व, बहुआयामी साझेदारी में परिवर्तित हो चुके हैं, जो आपसी विश्वास, विकास और साझा दृष्टिकोण पर आधारित है। प्रस्तावित मुक्त व्यापार समझौते और द्विपक्षीय निवेश संधि के साथ आने वाले समय में यह साझेदारी और अधिक व्यापक और मजबूत होने की उम्मीद है।

