वैश्विक मंदी के दौर में भारत बना उम्मीद की किरण, केंद्रीय बजट पर बोले प्रतुल शाहदेव

Shashi Bhushan Kumar

वैश्विक आर्थिक सुस्ती के बीच भारत की अर्थव्यवस्था मजबूत स्थिति में दिखाई दे रही है। केंद्रीय बजट को लेकर भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने कहा कि इस समय दुनिया की अधिकांश बड़ी अर्थव्यवस्थाएं मंदी के दबाव में हैं और आने वाले वित्तीय वर्ष के अनुमान भी कमजोर वैश्विक विकास की ओर इशारा कर रहे हैं। ऐसे माहौल में भारत एक “ब्राइट स्पॉट” के रूप में उभरा है और यह बजट देश की अर्थव्यवस्था को और मजबूती देने वाला है।

समाचार एजेंसी से बातचीत में प्रतुल शाहदेव ने कहा कि बजट में अर्थव्यवस्था के हर अहम क्षेत्र को संतुलित तरीके से ध्यान में रखा गया है। उन्होंने रक्षा क्षेत्र को सशक्त बनाने की आवश्यकता पर जोर देते हुए कहा कि देश की सुरक्षा सर्वोपरि है। ‘ऑपरेशन सिंदूर’ का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि भारतीय सशस्त्र बलों ने साहस और क्षमता का परिचय दिया है।

उन्होंने कहा कि भारत पहले भी अपनी सुरक्षा को लेकर कड़ा रुख अपना चुका है, लेकिन सीमाओं पर मौजूद चुनौतियों को देखते हुए हर समय सतर्क और तैयार रहना जरूरी है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे पर टिप्पणी करते हुए शाहदेव ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के पास ‘विकसित भारत’ को लेकर स्पष्ट और दीर्घकालिक दृष्टि है।

भाजपा प्रवक्ता ने कांग्रेस के शासनकाल पर सवाल उठाते हुए कहा कि उस दौरान वित्तीय अनुशासन की कमी रही, जबकि मौजूदा बजट में राजकोषीय घाटे को लगभग 4.3 प्रतिशत के आसपास सीमित रखा गया है, जो जिम्मेदार आर्थिक प्रबंधन को दर्शाता है।

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की आलोचना पर प्रतिक्रिया देते हुए उन्होंने कहा कि चुनावी असफलताओं के बाद भ्रम की स्थिति बन रही है। उन्होंने दावा किया कि राज्य के लिए कई महत्वपूर्ण योजनाओं की घोषणा की गई है, जिनमें पश्चिम बंगाल से गुजरने वाला हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर भी शामिल है।

मतदाता सूची के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि इस विषय पर सुप्रीम कोर्ट पहले ही अपना रुख स्पष्ट कर चुका है और उचित जांच के साथ प्रक्रिया जारी रखने की बात कही है।

इस बीच, पाकिस्तान द्वारा भारत के खिलाफ टी-20 विश्व कप मैच खेलने से इनकार करने पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रतुल शाहदेव ने कहा कि पाकिस्तान का इतिहास पीछे हटने का रहा है। उन्होंने कहा कि खेल को राजनीति से अलग रखना चाहिए और नियमों का पालन न करने पर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद को सख्त कदम उठाने चाहिए।

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