राजस्थान में अवैध ड्रग निर्माण इकाई का पर्दाफाश, 1.60 करोड़ की मेफेड्रोन बरामद

Shashi Bhushan Kumar

जयपुर। राजस्थान के प्रतापगढ़ जिले में मादक पदार्थों के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। ‘ऑपरेशन चक्रव्यूह’ के अंतर्गत एक खेत में संचालित अवैध ड्रग निर्माण इकाई का भंडाफोड़ किया गया। छापेमारी के दौरान भारी मात्रा में मेफेड्रोन (एमडी) और ड्रग्स बनाने के उपकरण बरामद किए गए, जिससे एक अंतरराज्यीय नेटवर्क के संकेत मिले हैं।

पुलिस अधीक्षक बी. आदित्य के निर्देश पर हथुनिया थाना पुलिस ने असावटा-कुलथाना मार्ग स्थित एक सुनसान खेत में दबिश दी। सीमेंट की चादरों से बनी झोपड़ी के भीतर एक अस्थायी मिनी ड्रग फैक्ट्री संचालित होती पाई गई। मौके से 1.897 किलोग्राम अवैध मेफेड्रोन जब्त की गई, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में अनुमानित कीमत लगभग 1.60 करोड़ रुपये बताई गई है।

कार्रवाई के दौरान इंडक्शन कुकर, मिक्सर, हीटर और इलेक्ट्रॉनिक वजन मशीन सहित नशीले पदार्थ तैयार करने में प्रयुक्त उपकरण भी जब्त किए गए। पुलिस ने प्रतापगढ़ के असावटा निवासी मुराद खान पठान और गुजरात के मेहसाणा निवासी मोहम्मद जुनैद को गिरफ्तार किया है। प्रारंभिक पूछताछ में दोनों ने हाल के दिनों में वहां ड्रग निर्माण की बात स्वीकार की है।

वहीं, प्रतापगढ़ के जीवन अंजना और मध्य प्रदेश के उज्जैन निवासी शारिक उर्फ जेरी मौके से फरार हो गए। उनकी तलाश में विशेष टीमें गठित की गई हैं।

छापेमारी के दौरान एक लोडेड पिस्तौल और पांच जिंदा कारतूस भी बरामद हुए। इसके अलावा तस्करी में इस्तेमाल की जा रही एक मोटरसाइकिल और एक कार को भी जब्त किया गया है।

पुलिस के अनुसार मुख्य आरोपी का आपराधिक रिकॉर्ड रहा है और उसके खिलाफ पूर्व में गंभीर धाराओं में मामले दर्ज हैं। पूरे अभियान की निगरानी वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा की गई। फिलहाल जब्त मादक पदार्थों के स्रोत और सप्लाई नेटवर्क की गहन जांच जारी है।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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