ED अधिकारियों के खिलाफ जांच पर झारखंड हाईकोर्ट की रोक, रांची पुलिस की कार्रवाई पर उठे सवाल

Ravikant Upadhyay

रांची। झारखंड हाईकोर्ट ने प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) के अधिकारियों के खिलाफ रांची पुलिस द्वारा की जा रही जांच पर फिलहाल रोक लगा दी है। न्यायमूर्ति संजय कुमार द्विवेदी की खंडपीठ ने इस मामले की सुनवाई करते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि जांच के नाम पर किसी केंद्रीय एजेंसी के कामकाज में बाधा नहीं डाली जा सकती। कोर्ट ने इस प्रकरण में राज्य सरकार और अन्य संबंधित पक्षों पर कड़ा रुख अपनाते हुए जवाबदेही तय करने के संकेत भी दिए हैं।

यह मामला उस घटना से जुड़ा है, जिसमें मनी लॉन्ड्रिंग केस के एक आरोपी संतोष कुमार ने ईडी अधिकारियों पर पूछताछ के दौरान प्रताड़ना का आरोप लगाया था। संतोष कुमार की शिकायत के आधार पर रांची पुलिस ने ईडी अधिकारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी थी। इसके बाद ईडी ने रांची पुलिस की इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए झारखंड हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। ईडी की दलील थी कि इस तरह की जांच से केंद्रीय एजेंसी की स्वायत्तता और उसके कानूनी अधिकारों पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने कहा कि केंद्रीय एजेंसियां संवैधानिक दायरे में काम करती हैं और उनके कार्यों में अनावश्यक हस्तक्षेप उचित नहीं है। कोर्ट ने फिलहाल रांची पुलिस की जांच पर रोक लगाते हुए राज्य सरकार को सात दिनों के भीतर अपना पक्ष स्पष्ट करने का निर्देश दिया है। इसके साथ ही शिकायतकर्ता संतोष कुमार को भी दस दिनों के भीतर अपने आरोपों के समर्थन में जवाब दाखिल करने का आदेश दिया गया है।

हाईकोर्ट ने इस मामले में एक महत्वपूर्ण आदेश देते हुए केंद्रीय गृह सचिव और शिकायतकर्ता संतोष कुमार को नयी पार्टी के रूप में शामिल करने का निर्देश भी दिया है। कोर्ट का मानना है कि इन पक्षों को सुनना मामले के निष्पक्ष और व्यापक निपटारे के लिए आवश्यक है। अब इन सभी जवाबों के दाखिल होने के बाद ही मामले की अगली सुनवाई की जाएगी।

इस बीच कोर्ट ने एक बड़ा और अहम फैसला लेते हुए रांची स्थित ईडी कार्यालय की सुरक्षा की जिम्मेदारी केंद्रीय सशस्त्र बलों को सौंप दी है। अब ईडी कार्यालय की सुरक्षा केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) या सीमा सुरक्षा बल (BSF) जैसे केंद्रीय बलों द्वारा की जाएगी। इस निर्णय को ईडी अधिकारियों की सुरक्षा और उनके निर्बाध कार्य संचालन के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

कानूनी जानकारों के अनुसार, हाईकोर्ट का यह आदेश केंद्र और राज्य के बीच अधिकारों के संतुलन को लेकर एक अहम संदेश देता है। कोर्ट ने संकेत दिया है कि कानून के दायरे में रहकर ही किसी भी तरह की जांच होनी चाहिए और केंद्रीय एजेंसियों के अधिकारों का सम्मान किया जाना चाहिए। फिलहाल पूरे राज्य की निगाहें इस मामले की अगली सुनवाई पर टिकी हुई हैं, जहां हाईकोर्ट इस संवेदनशील मुद्दे पर आगे की दिशा तय करेगा।

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