षष्ठम झारखण्ड विधान सभा के पंचम (बजट) सत्र, DAY- 4
विधायक हेमलाल मुर्मू ने विधानसभा में अल्पसूचित प्रश्न के जरिए राज्य की कानून-व्यवस्था पर अपनी ही सरकार से जवाब मांगा। उन्होंने कहा कि जब पुलिस लगातार कार्रवाई करने का दावा कर रही है, तो फिर अपराध की घटनाओं में वृद्धि क्यों दिखाई दे रही है। उन्होंने जेल से फरारी, मादक पदार्थों की अवैध खेती और बढ़ते साइबर अपराध जैसे मुद्दों को उठाया।
उन्होंने विशेष रूप से संथाल परगना क्षेत्र में साइबर अपराध के बढ़ते मामलों पर चिंता जताते हुए पूछा कि वहां प्रशिक्षित पुलिसकर्मियों की तैनाती और जनजागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं या नहीं। यदि ऐसे प्रयास हो रहे हैं, तो उनका विस्तृत विवरण सदन में प्रस्तुत किया जाए।
सरकार की ओर से मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने जवाब देते हुए कहा कि साइबर अपराध के अधिकांश मामलों में राशि की वसूली और आरोपियों की पहचान की गई है। उन्होंने यह भी बताया कि पुलिसकर्मियों को आवश्यक प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हालांकि, विपक्ष की विधायक नीरा यादव ने मंत्री द्वारा दिए गए आंकड़ों पर सवाल उठाते हुए उन्हें भ्रामक बताया।
हेमलाल मुर्मू ने वर्ष 2024 और 2025 के आंकड़े प्रस्तुत करते हुए कहा कि 2024 में 1498 साइबर अपराध के मामले दर्ज हुए, जिनमें 919 गिरफ्तारियां हुईं, लेकिन कोई भी दोषसिद्धि नहीं हुई और तीन आरोपी बरी हुए। वहीं 2025 में 1413 मामले दर्ज हुए, 1268 गिरफ्तारियां हुईं, जिनमें 37 मामलों में दोषसिद्धि हुई और 387 आरोपी बरी हुए। उन्होंने सवाल किया कि यदि अनुसंधान सही तरीके से हो रहा है, तो अदालतों में दोषसिद्धि की दर इतनी कम क्यों है।

