WEF दावोस में CII राउंडटेबल में मुख्यमंत्री हेमन्त सोरेन ने रखा झारखण्ड का सतत विकास मॉडल

Ravikant Upadhyay

दावोस/रांची — विश्व आर्थिक मंच (WEF) की वार्षिक बैठक के दौरान मुख्यमंत्री श्री हेमन्त सोरेन ने भारतीय उद्योग परिसंघ (CII) द्वारा आयोजित उच्चस्तरीय राउंडटेबल बैठक “Delivering Sustainability at Scale: Pathways for Global Transformation” में भाग लिया। इस अवसर पर उन्होंने वैश्विक नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के अग्रणी नेताओं और संस्थागत निवेशकों के समक्ष झारखण्ड के सतत, समावेशी और जन-केंद्रित विकास दृष्टिकोण को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया।

मुख्यमंत्री ने अपने संबोधन में स्पष्ट किया कि झारखण्ड केवल खनिजों और प्राकृतिक संसाधनों के निर्यातक राज्य के रूप में सीमित नहीं रहना चाहता। राज्य सरकार का लक्ष्य संसाधनों के मूल्य संवर्धन, डाउनस्ट्रीम औद्योगिकीकरण और दीर्घकालिक रोजगार सृजन के माध्यम से ऐसे विकास मॉडल को अपनाना है, जिससे झारखण्ड के लोगों को प्रत्यक्ष और स्थायी लाभ मिले। उन्होंने कहा कि “हमारा उद्देश्य केवल प्राकृतिक संसाधनों का दोहन नहीं, बल्कि उनका जिम्मेदार, संतुलित और सतत उपयोग सुनिश्चित करना है, ताकि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के अवसर बढ़ें और जीवन स्तर में सुधार हो।”

मुख्यमंत्री ने इस बात पर विशेष बल दिया कि सततता केवल पर्यावरण संरक्षण तक सीमित अवधारणा नहीं है। इसमें आजीविका, कौशल विकास, सामाजिक समावेशन और स्थानीय समुदायों की भागीदारी भी उतनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से आदिवासी और स्थानीय समुदायों को विकास की मुख्यधारा से जोड़ना राज्य सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से झारखण्ड सरकार खनिज-आधारित उद्योगों के साथ-साथ नवीकरणीय ऊर्जा, हरित प्रौद्योगिकी और मानव संसाधन विकास से जुड़ी पहलों को आगे बढ़ा रही है।

मुख्यमंत्री ने राज्य में चल रही विभिन्न योजनाओं का उल्लेख करते हुए बताया कि झारखण्ड में हरित ऊर्जा, सोलर और अन्य नवीकरणीय स्रोतों के विस्तार, आधुनिक औद्योगिक नीतियों और कौशल प्रशिक्षण कार्यक्रमों के माध्यम से युवाओं के लिए नए अवसर सृजित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि आर्थिक विकास तभी सार्थक है, जब वह पर्यावरणीय संतुलन और सामाजिक न्याय के साथ आगे बढ़े।

अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने झारखण्ड की पर्यटन संभावनाओं पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि राज्य में इको-टूरिज्म, प्रकृति आधारित पर्यटन और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़े पर्यटन को विकसित करने की अपार संभावनाएं हैं। पर्यटन को सतत विकास के एक महत्वपूर्ण स्तंभ के रूप में आगे बढ़ाते हुए सरकार का उद्देश्य स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर पैदा करना और प्राकृतिक व सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षण सुनिश्चित करना है।

दीर्घकालिक विकास दृष्टि को दोहराते हुए मुख्यमंत्री ने वैश्विक निवेशकों और साझेदारों को जिम्मेदार खनन, सतत विनिर्माण, नवीकरणीय ऊर्जा और पर्यटन अवसंरचना के क्षेत्रों में झारखण्ड के साथ सहयोग के लिए आमंत्रित किया। CII द्वारा आयोजित इस वैश्विक सततता संवाद में झारखण्ड की सक्रिय भागीदारी राज्य की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत आर्थिक विकास को पर्यावरणीय जिम्मेदारी और सामाजिक समावेशन के साथ जोड़ा जा रहा है।

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