पणजी से मिली जानकारी के अनुसार, गोवा ने देशभर में नई न्याय संहिताओं (नए आपराधिक कानूनों) के प्रभावी क्रियान्वयन में पहला स्थान हासिल किया है। फरवरी 2026 में ब्यूरो ऑफ पुलिस रिसर्च एंड डेवलपमेंट द्वारा जारी राष्ट्रीय रैंकिंग आकलन में राज्य को कुल 83.10 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए।
प्रशासनिक सुधारों के क्षेत्र में गोवा को पूरे 20 में से 20 अंक मिले। राज्य सरकार ने आवश्यक अधिसूचनाएं समय पर जारी करते हुए न्याय संहिताओं के अंतर्गत मॉडल नियमों को पूर्ण रूप से अपनाया। इससे कानूनों को लागू करने की तैयारी और समन्वय की क्षमता स्पष्ट होती है।
ऑपरेशनल दक्षता के मामले में भी राज्य का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा। जीरो एफआईआर दर्ज करने में 100 प्रतिशत अनुपालन, राष्ट्रीय स्वचालित फिंगरप्रिंट पहचान प्रणाली (NAFIS) का प्रभावी उपयोग, ई-साक्ष्य को अपनाना तथा जांच से अदालत तक डिजिटल प्रक्रियाओं को मजबूत करना प्रमुख उपलब्धियों में शामिल है। इन कदमों से जांच, साक्ष्य प्रबंधन और मामलों के निस्तारण में तेजी आई है।
सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी के उपयोग में भी गोवा को उच्च अंक प्राप्त हुए। ई-समन, न्याय श्रुति और मेडलीपीआर जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म के उपयोग ने तकनीक आधारित न्याय प्रणाली को मजबूती दी है।
सिस्टम इंटीग्रेशन के क्षेत्र में भी राज्य को पूरे अंक मिले हैं। अपराध और अपराधी ट्रैकिंग नेटवर्क एवं प्रणाली (CCTNS) सहित अन्य डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से पुलिस, अदालत, जेल, फोरेंसिक विज्ञान प्रयोगशाला और अभियोजन विभाग के बीच दो-तरफा समन्वय स्थापित किया गया है, जिससे रियल-टाइम डेटा साझा किया जा रहा है।
यह उपलब्धि आपराधिक न्याय प्रणाली से जुड़े सभी विभागों के सामूहिक प्रयास का परिणाम मानी जा रही है। गोवा पुलिस ने न्यायपालिका, अभियोजन, जेल प्रशासन और फोरेंसिक सेवाओं के साथ मिलकर नए कानूनों को प्रभावी ढंग से लागू करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
राष्ट्रीय रैंकिंग से स्पष्ट है कि गोवा पारदर्शी, नागरिक-केंद्रित और तकनीक-सक्षम न्याय व्यवस्था की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। राज्य सरकार आगे भी नए आपराधिक कानूनों के प्रभावी कार्यान्वयन और क्षमता निर्माण पर जोर देने की बात कह रही है, ताकि नागरिकों को त्वरित और निष्पक्ष न्याय मिल सके।

