गोवा : 20 साल पुराने फ्रॉड मामले में सीबीआई को बड़ी कामयाबी, पूर्व बैंक अधिकारी और कर्जदार को एक साल की सजा

Shashi Bhushan Kumar

पणजी, केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) द्वारा जांच किए गए एक पुराने कार लोन धोखाधड़ी मामले में नॉर्थ गोवा स्थित विशेष अदालत ने पूर्व बैंक अधिकारी और एक कर्जदार को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई है। मामला बैंकिंग नियमों के उल्लंघन और कथित मिलीभगत से जुड़ा था।

सीबीआई ने 29 दिसंबर 2011 को केनरा बैंक की पोंडा शाखा के तत्कालीन अधिकारी वी.वी.एन. शास्त्री और गोवा निवासी यासीन के शेख के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की थी। जांच एजेंसी के अनुसार, आरोप था कि कर्जदार ने वाहन खरीद से जुड़े दस्तावेजों में अनियमितताएं कीं और बैंक अधिकारी ने नियमों की अनदेखी करते हुए पांच लाख रुपये का वाहन ऋण स्वीकृत किया, जबकि संबंधित वाहन पहले से ही उसके नाम पर दर्ज था।

जांच में यह भी सामने आया कि उसी वाहन के आधार पर दूसरी शाखा से भी ऋण लिया गया। इस तरह एक ही वाहन को दो अलग-अलग ऋणों के लिए प्रस्तुत कर कुल दस लाख रुपये का लोन लिया गया। सीबीआई का कहना था कि यह बैंक की आंतरिक प्रक्रियाओं और वित्तीय नियमों के विपरीत था।

मामले की जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया गया। सुनवाई के दौरान अदालत ने 30 जनवरी 2026 को दोनों को दोषी करार दिया और 9 फरवरी 2026 को सजा सुनाई। अदालत ने दोनों को एक वर्ष की साधारण कारावास और जुर्माना अदा करने का आदेश दिया। सजा भ्रष्टाचार निरोधक कानून और भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं के तहत दी गई।

यह मामला दर्शाता है कि वित्तीय अनियमितताओं और बैंकिंग धोखाधड़ी के मामलों में लंबी कानूनी प्रक्रिया के बाद भी न्यायिक निर्णय संभव है। जांच एजेंसी ने कहा कि शिकायत मिलने के बाद विस्तृत जांच की गई, जिसमें दस्तावेजों और ऋण स्वीकृति प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों की पुष्टि हुई।

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