नई दिल्ली, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ हुए ‘परीक्षा पे चर्चा’ कार्यक्रम का सकारात्मक असर देशभर के विभिन्न राज्यों में देखने को मिला। इस संवाद कार्यक्रम ने छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को यह समझाया कि परीक्षा जीवन का एक हिस्सा है, न कि पूरी मंजिल।
दिल्ली में कार्यक्रम में शामिल कक्षा 10वीं के एक छात्र ने बताया कि प्रधानमंत्री की बातें बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी में मददगार साबित हुईं। उन्होंने सरल भाषा में तनाव से निपटने के तरीके बताए। छात्र ने कहा कि परीक्षा को लेकर चिंता स्वाभाविक है, लेकिन इसे डर में नहीं बदलना चाहिए।
एक अन्य मेधावी छात्र ने साझा किया कि बेहतर प्रदर्शन का लगातार दबाव कई बार आत्मविश्वास को कमजोर कर देता है। इस कार्यक्रम से उसे यह समझ मिली कि परीक्षा महत्वपूर्ण जरूर है, लेकिन इससे भविष्य पूरी तरह तय नहीं होता।
छात्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री ने रटने की बजाय विषय को समझकर पढ़ने पर जोर दिया। साथ ही समय प्रबंधन, नियमित अध्ययन और संतुलित दिनचर्या अपनाने की सलाह दी।
दिल्ली के आरके पुरम क्षेत्र के मोती बाग स्थित स्कूल में शिक्षा मंत्री आशीष सूद भी पहुंचे। उन्होंने छात्रों से बातचीत करते हुए कहा कि परीक्षा का डर दूर करना जरूरी है। उन्होंने बताया कि दिल्ली की शिक्षा व्यवस्था में बच्चों की रचनात्मकता और नवाचार को बढ़ावा दिया जा रहा है, ताकि वे बिना डर के नई सोच विकसित कर सकें।
मणिपुर के इंफाल में भी इस कार्यक्रम को लेकर उत्साह देखा गया। अतिरिक्त शिक्षा निदेशक बिशेश्वर खुमुकचम ने बताया कि राज्य के सभी 17 जिलों के स्कूल इस कार्यक्रम से जुड़े। मुख्यमंत्री युमनाम खेमचंद सिंह ने वांगखेई हाई स्कूल में आयोजित कार्यक्रम में भाग लिया, जहां करीब 2,000 छात्रों ने प्रधानमंत्री का लाइव संवाद देखा।
त्रिपुरा के अगरतला स्थित बोर्डोवाली स्कूल में मुख्यमंत्री माणिक साहा ने छात्रों से बातचीत की और उन्हें सकारात्मक सोच, बेहतर समय प्रबंधन और तनावमुक्त रहकर परीक्षा देने के लिए प्रेरित किया।
पटना, बिहार में भी छात्रों ने ऑनलाइन कार्यक्रम देखा। प्राइवेट स्कूल्स एंड चिल्ड्रेन वेलफेयर एसोसिएशन के अध्यक्ष शमायल अहमद ने कहा कि यह कार्यक्रम छात्रों को मानसिक रूप से मजबूत बनाने में मदद कर रहा है। उन्होंने नियमित अध्ययन, समय पर पाठ्यक्रम पूरा करने और स्वास्थ्य का ध्यान रखने की सलाह दी।
झारखंड की राजधानी रांची में भी ‘परीक्षा पे चर्चा’ का असर दिखा। जेवीएम शामली स्कूल के प्रचार समरजीत जाना ने कहा कि इस कार्यक्रम ने छात्रों को यह समझने में मदद की कि परीक्षा के तनाव को सकारात्मक ऊर्जा में कैसे बदला जा सकता है और संतुलित विकास कैसे किया जाए।

