नई दिल्ली में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने वीडियोकॉन मॉजाम्बिक ऑयल डील से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में वी.एन. धूत सहित 13 आरोपियों और संबंधित कंपनियों के खिलाफ धन शोधन निवारण अधिनियम, 2002 के तहत अभियोजन शिकायत दायर की है। यह शिकायत 18 दिसंबर 2024 को विशेष अदालत, राउज एवेन्यू, नई दिल्ली में दाखिल की गई थी। अदालत ने 10 फरवरी 2026 को मामले में संज्ञान लेते हुए सभी आरोपियों को नोटिस जारी किए हैं।
इस प्रकरण की पृष्ठभूमि में केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो द्वारा 23 जून 2020 को दर्ज एफआईआर है। इसमें भारतीय दंड संहिता की धारा 120-बी और 420 तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की संबंधित धाराओं के तहत आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी और कदाचार के आरोप लगाए गए थे।
जांच के दौरान ईडी को कथित रूप से यह जानकारी मिली कि विदेशी मुद्रा ऋण का उपयोग निर्धारित उद्देश्य—विदेश में तेल और गैस परियोजनाओं के विकास एवं पुनर्वित्त—के बजाय अन्य व्यवसायिक गतिविधियों और परिसंपत्तियों के निर्माण में किया गया। आरोप है कि धनराशि पहले समूह की विदेशी इकाइयों के माध्यम से स्थानांतरित की गई और बाद में जटिल लेनदेन के जरिए भारत वापस लाई गई।
रिपोर्ट के अनुसार, धन को सर्कुलर ट्रांजैक्शन, निर्यात अग्रिम, इंटर-कंपनी ऋण और निवेश के माध्यम से भारत में पुनः प्रवाहित किया गया। जांच एजेंसी का कहना है कि लेनदेन की वास्तविक प्रकृति छिपाने के लिए कथित तौर पर भ्रामक प्रमाण-पत्र बैंकों को उपलब्ध कराए गए।
जांच में यह भी सामने आया कि कुल 4.54 अरब अमेरिकी डॉलर की सुविधा में से लगभग 2.02 अरब डॉलर कथित रूप से गैर-निर्धारित उद्देश्यों की ओर मोड़े गए। वर्ष 2018 में संबंधित कंपनियों के खाते एनपीए घोषित हुए। बैंकों का कुल दावा 61,773.02 करोड़ रुपये बताया गया, जिसमें 23,647.12 करोड़ रुपये एनपीए के रूप में शामिल थे।
ईडी ने मामले में दो अस्थायी जब्ती आदेश जारी कर 17.69 करोड़ और 38.58 करोड़ रुपये मूल्य की संपत्तियां अटैच की हैं। एजेंसी ने कुल 1,136.49 करोड़ रुपये की कथित अपराध आय के संबंध में अभियोजन शिकायत दायर की है।
यह मामला विदेशी ऋण के उपयोग और बैंकिंग प्रणाली से जुड़े वित्तीय लेनदेन की जांच से संबंधित है, जिसकी सुनवाई विशेष अदालत में जारी रहेगी।

