डीएमएफ निधि में पारदर्शिता की मांग, जंगलमहल स्वराज मोर्चा ने सरकार को सौंपा ज्ञापन
कोलकाता/झाड़ग्राम: खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास के लिए स्थापित जिला खनिज फाउंडेशन (डीएमएफ) निधि के संग्रह और व्यय से संबंधित विस्तृत जानकारी सार्वजनिक करने की मांग को लेकर जंगलमहल स्वराज मोर्चा (जेएसएम) ने राज्य सरकार को आवेदन सौंपा है। संगठन ने झाड़ग्राम के जिलाधिकारी को ज्ञापन देने के साथ-साथ पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री को भी ईमेल के माध्यम से पत्र भेजा है।

जिला खनिज फाउंडेशन की स्थापना खनन एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) अधिनियम, 2015 के अंतर्गत की गई थी। इसका उद्देश्य खनन से प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य, शिक्षा, पेयजल, आजीविका और आधारभूत संरचना जैसे आवश्यक क्षेत्रों में विकास कार्यों को बढ़ावा देना है।
संगठन ने वर्ष 2023 में संसद में प्रस्तुत आंकड़ों का उल्लेख करते हुए कहा कि पश्चिम बंगाल में लगभग 148.57 करोड़ रुपये की डीएमएफ निधि एकत्रित हुई थी, जबकि लगभग 36.38 करोड़ रुपये व्यय किए जाने की जानकारी दी गई। जेएसएम का कहना है कि जनहित, पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए जिला-वार संग्रह एवं व्यय का पूरा विवरण सार्वजनिक किया जाना आवश्यक है।
अपने आवेदन में संगठन ने निम्नलिखित मांगें रखी हैं—
- राज्य में डीएमएफ निधि की जिला-वार कुल संग्रह राशि सार्वजनिक की जाए।
- प्रत्येक जिले में हुए व्यय और वर्तमान शेष राशि का विवरण जारी किया जाए।
- डीएमएफ के अंतर्गत स्वीकृत और पूर्ण की गई परियोजनाओं की सूची प्रकाशित की जाए।
- निधि के उपयोग से संबंधित आवधिक लेखा-परीक्षण प्रतिवेदन जनता के लिए उपलब्ध कराए जाएं।
- खनन प्रभावित निवासियों के लिए एक प्रभावी शिकायत निवारण तंत्र स्थापित किया जाए।
- निधि के उपयोग के लिए पारदर्शी एवं सहभागी नीति बनाई जाए, जिसमें प्रभावित समुदायों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित हो।
जंगलमहल स्वराज मोर्चा का कहना है कि डीएमएफ निधि खनन प्रभावित क्षेत्रों के लोगों का अधिकार है और इसका उपयोग पूर्ण पारदर्शिता तथा जनसहभागिता के साथ होना चाहिए। संगठन का मानना है कि वित्तीय और परियोजना संबंधी जानकारी सार्वजनिक होने से लोकतांत्रिक उत्तरदायित्व सुदृढ़ होगा और विकास योजनाओं का लाभ वास्तविक हितग्राहियों तक पहुंचेगा।
मोर्चा ने आशा व्यक्त की है कि राज्य सरकार इस विषय पर शीघ्र आवश्यक कदम उठाएगी।

