नई दिल्ली — सरकार ने जानकारी दी है कि वित्त वर्ष 2019-20 से 2023-24 के बीच भारतीय कंपनियों का कुल कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (सीएसआर) खर्च 1,44,159 करोड़ रुपये से अधिक हो चुका है।
कॉरपोरेट मामलों के राज्य मंत्री हर्ष मल्होत्रा ने राज्यसभा में लिखित जवाब में बताया कि कंपनियों द्वारा किए गए सीएसआर व्यय का पूरा विवरण एमसीए21 रजिस्ट्री पर सार्वजनिक रूप से उपलब्ध है। इसमें राज्य, वर्ष, कंपनी और परियोजना के आधार पर जानकारी देखी जा सकती है।
उन्होंने कहा कि सीएसआर परियोजनाओं की योजना बनाना, उन्हें लागू करना और उनकी निगरानी करना संबंधित कंपनी के निदेशक मंडल की जिम्मेदारी है।
कंपनी (सीएसआर नीति) नियम, 2014 के तहत जिन कंपनियों की पिछले तीन वित्तीय वर्षों में औसत सीएसआर देनदारी 10 करोड़ रुपये या उससे अधिक रही है, उन्हें अपने सीएसआर प्रोजेक्ट्स का प्रभाव मूल्यांकन (इम्पैक्ट असेसमेंट) कराना अनिवार्य है। यह मूल्यांकन किसी स्वतंत्र एजेंसी द्वारा किया जाना चाहिए और यह उन परियोजनाओं पर लागू होता है जिन पर 1 करोड़ रुपये या उससे अधिक खर्च किया गया हो और जो कम से कम एक साल पहले पूरी हो चुकी हों।
मंत्री ने यह भी बताया कि 2021 से 2025 के बीच एमसीए21 पोर्टल पर लगभग 3.84 करोड़ फाइलिंग दर्ज की गईं। इनमें से 3.33 करोड़ आवेदन सीधे प्रक्रिया के तहत स्वीकृत किए गए, जबकि करीब 40.8 लाख फाइलिंग संबंधित रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज और क्षेत्रीय निदेशकों द्वारा मंजूर की गईं। वहीं, लगभग 8.3 लाख फॉर्म विभिन्न कारणों से खारिज कर दिए गए।
उन्होंने कहा कि कारोबार को आसान बनाने और पारदर्शिता बढ़ाने के लिए एमसीए21 का नया संस्करण ‘एमसीए21 वी3’ शुरू किया गया है। इसमें वेब फाइलिंग, एलएलपी मॉड्यूल, कंपनी मॉड्यूल, ई-एन्फोर्समेंट, ई-एडजुडिकेशन, ई-कंसल्टेशन और ई-बुक लर्निंग मैनेजमेंट सिस्टम जैसी सुविधाएं शामिल हैं।
इसके अलावा, पोर्टल से जुड़ी समस्याओं के समाधान के लिए हेल्प डेस्क भी स्थापित की गई है। वित्त वर्ष 2025-26 में 31 जनवरी 2026 तक 3,16,877 हेल्प डेस्क टिकट दर्ज किए गए, जिनमें से लगभग 98 प्रतिशत मामलों का समाधान किया जा चुका है।
इन शिकायतों में तकनीकी समस्याएं, जानकारी से जुड़ी दिक्कतें, प्रक्रिया संबंधी अनुरोध और सुझाव शामिल थे। मंत्री ने कहा कि एमसीए21 पर हर साल बड़ी संख्या में ऑनलाइन फॉर्म दाखिल किए जाते हैं, इसलिए इसे लगातार बेहतर बनाया जा रहा है।

