RANCHI
भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने कांग्रेस पर तीखा हमला करते हुए देश की आजादी में उसकी भूमिका पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने स्वतंत्रता संग्राम में निर्णायक संघर्ष नहीं किया, बल्कि ब्रिटिश शासन के साथ समझौते की नीति अपनाई।
आईएएनएस से बातचीत में उन्होंने कहा कि पंडित जवाहरलाल नेहरू के जेल जीवन को सामान्य कारावास नहीं कहा जा सकता, क्योंकि उन्हें विशेष सुविधाएं मिली हुई थीं। उनके अनुसार, 1942 के ‘भारत छोड़ो आंदोलन’ को छोड़कर कांग्रेस ने स्वतंत्रता प्राप्ति तक कोई बड़ा जनांदोलन नहीं चलाया और बाद में ब्रिटिश सरकार से सामंजस्य स्थापित कर लिया।
उन्होंने यह भी कहा कि लाला लाजपत राय को छोड़ दें तो कांग्रेस का कोई ऐसा नेता नहीं दिखता जिसने आजादी के लिए उल्लेखनीय संघर्ष किया हो। उनके अनुसार, कांग्रेस नेतृत्व ने ब्रिटिश शासन के प्रति निष्ठा की शपथ ली थी, जिससे उनकी देशभक्ति पर सवाल खड़े होते हैं।
प्रतुल शाह देव ने दावा किया कि नेहरू ने कैबिनेट मिशन के साथ मिलकर काम किया और उनका मुख्य उद्देश्य आजादी के बाद सत्ता हासिल करना था, न कि स्वतंत्रता आंदोलन को मजबूत करना।
उन्होंने यह भी पूछा कि 1947 में आजादी मिलने के बाद भी लॉर्ड माउंटबेटन भारत के वायसराय क्यों बने रहे और ब्रिटिश अधिकारी क्यों कई वर्षों तक भारतीय सेना और नौसेना के प्रमुख पदों पर बने रहे। उनके अनुसार, यह सब दर्शाता है कि कांग्रेस और ब्रिटिश शासन के बीच लंबे समय से मधुर संबंध रहे हैं।

