RANCHI
भारत-अमेरिका के बीच हाल में हुए व्यापार समझौते को लेकर कांग्रेस ने केंद्र सरकार की नीतियों पर सवाल खड़े किए हैं। अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के सचिव प्रणव झा ने रांची स्थित कांग्रेस भवन में आयोजित संवाददाता सम्मेलन में कहा कि देश इस समय जटिल परिस्थितियों से गुजर रहा है और नीतिगत फैसलों को लेकर आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति बनी हुई है। उन्होंने कहा कि सरकार को बड़े अंतरराष्ट्रीय समझौतों पर पारदर्शिता बरतनी चाहिए।
प्रणव झा ने आरोप लगाया कि हालिया व्यापार समझौता अमेरिकी हितों के अनुरूप अधिक दिखाई देता है और इससे भारत के आर्थिक संतुलन पर असर पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में अमेरिका को भारत का निर्यात 86 अरब डॉलर और आयात 46 अरब डॉलर रहा, जिससे 40 अरब डॉलर का व्यापार अधिशेष था। उनके अनुसार, यदि अमेरिका से अतिरिक्त 100 अरब डॉलर की खरीद की जाती है तो यह अधिशेष घटकर घाटे में बदल सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि चीन के साथ पहले से ही भारत का व्यापार घाटा 116 अरब डॉलर के आसपास है, ऐसे में नई व्यापार व्यवस्था पर गंभीर समीक्षा आवश्यक है।
कृषि क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने कहा कि यदि भारतीय बाजार को अमेरिकी कृषि उत्पादों के लिए खोला जाता है तो इसका असर देश के किसानों पर पड़ सकता है। उनका कहना था कि अमेरिकी किसानों को भारी सब्सिडी मिलती है, जबकि भारतीय किसानों को सीमित आर्थिक सहायता मिलती है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा असमान हो सकती है।
कपास और वस्त्र उद्योग के संदर्भ में उन्होंने चिंता जताते हुए कहा कि यदि टैरिफ संरचना में असंतुलन रहा तो भारतीय निर्यातकों को नुकसान उठाना पड़ सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि ऊर्जा क्षेत्र में रूस से तेल आयात की नीति में किसी भी बदलाव का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था और आम उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।
प्रणव झा ने मांग की कि इस तरह के महत्वपूर्ण समझौतों से पहले राज्यों से व्यापक विचार-विमर्श किया जाए और संसद में सभी शर्तों को सार्वजनिक किया जाए। उन्होंने पूछा कि किसानों, छोटे उद्योगों और खनन आधारित राज्यों के हितों की सुरक्षा के लिए क्या विशेष प्रावधान किए गए हैं।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष केशव महतो कमलेश ने भी कहा कि आर्थिक समझौतों में देश की संप्रभुता और आत्मनिर्भरता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। उन्होंने विनिर्माण क्षेत्र की घटती हिस्सेदारी पर चिंता जताते हुए कहा कि सरकार को घरेलू उद्योगों को सशक्त बनाने की दिशा में ठोस कदम उठाने चाहिए।
संवाददाता सम्मेलन में पार्टी के अन्य पदाधिकारी भी मौजूद थे। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि वे इस मुद्दे को व्यापक स्तर पर उठाएंगे और जनहित से जुड़े सवालों पर सरकार से स्पष्ट जवाब की मांग करेंगे।

