अमेरिकी पेंटागन रिपोर्ट में अरुणाचल प्रदेश पर चीन के दावे को बताया ‘कोर इंटरेस्ट’, भारत-चीन संबंधों पर जताई चिंता

Ravikant Upadhyay

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) द्वारा अमेरिकी कांग्रेस को सौंपी गई एक अहम रिपोर्ट में चीन के अरुणाचल प्रदेश पर दावे को उसकी घोषित “कोर इंटरेस्ट्स” यानी मूल राष्ट्रीय हितों का हिस्सा बताया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन इन तथाकथित कोर इंटरेस्ट्स पर किसी भी प्रकार की बातचीत, समझौते या समझौता करने के लिए तैयार नहीं है।

रिपोर्ट के अनुसार, चीन के नेतृत्व ने समय के साथ अपने कोर इंटरेस्ट्स का दायरा बढ़ाया है। अब इसमें ताइवान, दक्षिण चीन सागर में समुद्री विवाद, सेनकाकू द्वीप समूह और भारत का पूर्वोत्तर राज्य अरुणाचल प्रदेश भी शामिल कर लिया गया है। पेंटागन की रिपोर्ट में कहा गया है कि चीनी अधिकारियों के अनुसार, चीन और विवादित क्षेत्रों का “एकीकरण” वर्ष 2049 तक “चीनी राष्ट्र के महान पुनरुत्थान” (Great Rejuvenation of the Chinese Nation) के लिए एक स्वाभाविक आवश्यकता है।

रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि एक “पुनरुत्थानशील” चीन खुद को वैश्विक स्तर पर एक नई शक्ति के रूप में स्थापित करना चाहता है। इसके तहत वह एक ऐसी “विश्व स्तरीय” सैन्य ताकत तैयार कर रहा है, जो किसी भी परिस्थिति में “लड़ने और जीतने” में सक्षम हो। साथ ही, बीजिंग अपनी संप्रभुता, सुरक्षा और विकास हितों की “दृढ़ता से रक्षा” करने के लिए प्रतिबद्ध है।

पेंटागन की इस रिपोर्ट में चीन के तीन प्रमुख कोर इंटरेस्ट्स का उल्लेख किया गया है, जिन्हें राष्ट्रीय पुनरुत्थान के लिए अनिवार्य बताया गया है और जिन पर कोई समझौता संभव नहीं है। इनमें पहला है चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) का सत्ता पर नियंत्रण, दूसरा चीन के आर्थिक विकास को बढ़ावा देना और तीसरा उसकी संप्रभुता तथा क्षेत्रीय दावों की रक्षा और विस्तार।

रिपोर्ट यह भी रेखांकित करती है कि चीनी कम्युनिस्ट पार्टी अपने शासन के खिलाफ किसी भी तरह की आलोचना या चुनौती के प्रति अत्यंत संवेदनशील है, चाहे वह घरेलू हो या अंतरराष्ट्रीय। पार्टी को यह आशंका रहती है कि यदि वह कथित चीनी हितों की रक्षा करने में विफल दिखी, तो इससे उसकी वैधता पर सवाल उठ सकते हैं।

भारत-चीन संबंधों के संदर्भ में रिपोर्ट में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर हालिया घटनाक्रमों का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि अक्टूबर 2024 में भारतीय नेतृत्व ने चीन के साथ LAC पर शेष गतिरोध वाले स्थानों से सैनिकों को पीछे हटाने (डिसएंगेजमेंट) पर सहमति की घोषणा की थी। यह घोषणा ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान राष्ट्रपति शी जिनपिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मुलाकात से दो दिन पहले की गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, इस बैठक के बाद दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय मासिक संवाद की शुरुआत हुई, जिसमें सीमा प्रबंधन और द्विपक्षीय संबंधों के भविष्य के कदमों पर चर्चा की गई। इनमें सीधी उड़ानों की बहाली, वीजा सुविधा और शिक्षाविदों व पत्रकारों के आदान-प्रदान जैसे मुद्दे शामिल हैं।

हालांकि, पेंटागन रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि चीन भले ही LAC पर तनाव कम करके द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर करना चाहता हो और अमेरिका-भारत संबंधों को और गहरा होने से रोकना चाहता हो, लेकिन भारत चीन की नीयत और कदमों को लेकर सतर्क बना रहेगा। रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि आपसी अविश्वास और अन्य विवादास्पद मुद्दों के चलते भारत-चीन संबंधों में पूर्ण सामान्यीकरण फिलहाल कठिन बना रहेगा।

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