राज्यपाल के धन्यवाद प्रस्ताव पर बाबूलाल मरांडी का बयान, जमीन और विस्थापन के मुद्दे उठाए

Shashi Bhushan Kumar

झारखंड विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान विपक्ष के नेता बाबूलाल मरांडी ने सरकार पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की। उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान कई वक्ता मूल विषय से हटकर अन्य मुद्दों पर बोलते रहे, जबकि राज्य की बुनियादी समस्याओं पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखी।

मरांडी ने कहा कि झारखंड की जनता विधानसभा की कार्यवाही पर नजर रखती है और उम्मीद करती है कि सदन में राज्य के मूल प्रश्नों पर सार्थक चर्चा हो। उन्होंने सवाल उठाया कि झारखंड राज्य का गठन किन उद्देश्यों से हुआ था और क्या उन उद्देश्यों की दिशा में पर्याप्त प्रगति हो रही है। उन्होंने याद दिलाया कि राज्य निर्माण के लिए लंबे समय तक आंदोलन हुए और जल, जंगल तथा जमीन के अधिकारों के लिए लोगों ने संघर्ष किया।

विपक्ष के नेता ने आरोप लगाया कि राज्य गठन के बाद भी विस्थापन की समस्याएं समाप्त नहीं हुई हैं। उन्होंने कहा कि खनन और औद्योगिक परियोजनाओं के नाम पर लोगों को उनकी जमीन से हटाया जा रहा है। जसीडीह क्षेत्र का उल्लेख करते हुए उन्होंने दावा किया कि वहां स्थानीय निवासियों को कठिन परिस्थितियों का सामना करना पड़ रहा है और खेतों पर कार्रवाई की जा रही है।

उन्होंने कहा कि उद्योग और अस्पताल स्थापित करने के लिए बंजर भूमि का उपयोग किया जा सकता है, जबकि उपजाऊ जमीन और वर्षों से बसे लोगों को हटाना उचित नहीं है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस विषय पर विधानसभा की एक समिति बनाकर विधायकों को प्रभावित क्षेत्रों का दौरा करना चाहिए, ताकि वस्तुस्थिति सामने आ सके।

सदन की कार्यवाही के दौरान उन्होंने यह भी कहा कि यदि आवश्यकता पड़ी तो वह स्वयं संबंधित क्षेत्रों का दौरा करेंगे। चर्चा के बीच सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच विभिन्न मुद्दों पर तीखी बहस भी देखने को मिली।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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