झारखंड विधानसभा में बोले बाबूलाल मरांडी- राज्यपाल के अभिभाषण में झलकी सरकार की ‘बेबसी’

Shashi Bhushan Kumar

झारखंड विधानसभा के बजट सत्र के दूसरे दिन राज्यपाल के अभिभाषण पर हुई चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने राज्य सरकार की कार्यशैली पर कड़ी टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि अभिभाषण सरकार द्वारा तैयार किया गया दस्तावेज होता है, लेकिन इस बार उसमें स्पष्ट दिशा और ठोस पहल की कमी दिखाई दी।

मरांडी ने कानून-व्यवस्था, भूमि अधिग्रहण, खनन नीतियों, बजट घोषणाओं और प्रशासनिक नियुक्तियों से जुड़े मुद्दों को सदन में उठाया। उन्होंने 26 जनवरी के अवसर पर मुख्यमंत्री के विदेश प्रवास पर सवाल उठाते हुए इसे संवैधानिक दायित्वों से जुड़ा विषय बताया।

राज्य के ऐतिहासिक और सामाजिक योगदान का उल्लेख करते हुए उन्होंने बिरसा मुंडा, जयपाल सिंह मुंडा और दिशोम गुरु जैसी विभूतियों के सम्मान में प्रतिमाएं स्थापित करने तथा उनके संघर्षों पर आधारित एक विशेष पुस्तकालय बनाने का सुझाव दिया।

भूमि और विस्थापन के मुद्दे पर उन्होंने जसीडीह और दुमका के अमड़ापाड़ा क्षेत्र का उल्लेख करते हुए कहा कि औद्योगिक और खनन परियोजनाओं के नाम पर उपजाऊ जमीन प्रभावित हो रही है। उनका मत था कि उद्योगों के लिए बंजर भूमि को प्राथमिकता दी जानी चाहिए और प्रभावित परिवारों का समुचित पुनर्वास सुनिश्चित होना चाहिए।

रांची में रिम्स-2 परियोजना के लिए भूमि चयन को लेकर भी उन्होंने आपत्ति जताई और वैकल्पिक भूमि के उपयोग की बात कही। बहस के दौरान मंत्री इरफान अंसारी ने प्रतिपक्ष पर आरोप लगाए, जिस पर मरांडी ने स्पष्ट किया कि वे विकास परियोजनाओं के विरोध में नहीं, बल्कि भूमि चयन की प्रक्रिया पर सवाल उठा रहे हैं।

इसके अतिरिक्त उन्होंने पूर्व पुलिस महानिदेशक की नियुक्ति प्रक्रिया, कथित अनियमितताओं, भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो की कार्यप्रणाली, सूचना आयुक्तों के रिक्त पद, खनिज ब्लॉकों की नीलामी और धान खरीद लक्ष्य जैसे विषयों को भी चर्चा में रखा। सदन में इन मुद्दों को लेकर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली।

Share This Article
शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
Leave a Comment