रांची की लेखिका अंशिता सिन्हा को मिला ‘स्व. रामरतन प्रसाद सिंह स्मृति सम्मान’, हिंदी साहित्य में योगदान के लिए हुआ सम्मान

Ravikant Upadhyay

रांची की जानी-मानी लेखिका अंशिता सिन्हा को हिंदी साहित्य के संरक्षण और संवर्धन में उनके उत्कृष्ट योगदान के लिए ‘स्व. रामरतन प्रसाद सिंह स्मृति सम्मान’ से सम्मानित किया गया। यह सम्मान समारोह बिहार के नवादा जिले के सोखोदेवरा में आयोजित किया गया, जो लोकनायक जयप्रकाश नारायण की कर्मभूमि के रूप में जाना जाता है। कार्यक्रम का आयोजन अशोक स्मृति संस्थान एवं साहित्य प्रेरणा मंच के संयुक्त तत्वावधान में किया गया।

सम्मान समारोह में देश-विदेश से साहित्य, पत्रकारिता और सामाजिक क्षेत्र से जुड़ी कई प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति रही। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि बिहार विधानसभा के सदस्य अनिल सिंह थे, जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ साहित्यकारों ने की। आयोजन के संयोजक ओंकार शर्मा कश्यप ने कार्यक्रम की भूमिका रखते हुए कहा कि इस तरह के सम्मान साहित्यिक प्रतिभाओं को नई ऊर्जा और प्रेरणा देते हैं।

सम्मान प्राप्त करने के बाद अपने संबोधन में अंशिता सिन्हा ने भावुक होते हुए कहा कि जिस क्षेत्र में उनका जन्म हुआ और जहां उनका बचपन बीता, उसी धरती पर सम्मान मिलना उनके लिए अत्यंत गर्व और आत्मिक संतोष का क्षण है। उन्होंने कहा कि यह सम्मान न केवल उनकी व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि उस मिट्टी का भी सम्मान है, जिसने उन्हें साहित्य के संस्कार दिए। अंशिता ने यह भी कहा कि वह आगे भी निरंतर प्रयास करेंगी कि साहित्य के माध्यम से अपने क्षेत्र और भाषा का नाम राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और ऊंचाइयों तक पहुंचा सकें।

कार्यक्रम में पूर्व विधायक एवं वरिष्ठ साहित्यकार डॉ. उषा सिन्हा ने अंशिता सिन्हा के साहित्यिक योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा कि उनकी रचनाओं में सामाजिक सरोकार, संवेदनशीलता और भाषा की सहजता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में जब साहित्य को बाजारवाद से जूझना पड़ रहा है, ऐसे समय में अंशिता जैसी लेखिकाओं का योगदान बेहद महत्वपूर्ण है।

इस अवसर पर वक्ताओं ने ‘स्व. रामरतन प्रसाद सिंह स्मृति सम्मान’ के महत्व पर भी चर्चा की। यह सम्मान साहित्य, पत्रकारिता और समाज सेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली विभूतियों को प्रदान किया जाता है। सम्मान का उद्देश्य उन लोगों को प्रोत्साहित करना है, जो समाज में सकारात्मक बदलाव लाने के लिए अपने लेखन और कर्म से योगदान दे रहे हैं।

गौरतलब है कि यह सम्मान दिवंगत पत्रकार एवं साहित्यकार रत्नाकर भारती की स्मृति में आयोजित किया जाता है। रत्नाकर भारती ने अपने जीवनकाल में पत्रकारिता और साहित्य के माध्यम से सामाजिक चेतना को जागृत करने का कार्य किया था। उन्हीं की स्मृति को जीवंत बनाए रखने के उद्देश्य से यह सम्मान प्रतिवर्ष प्रदान किया जाता है।

समारोह के अंत में आयोजकों ने सभी अतिथियों, साहित्यकारों और प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया और भविष्य में भी इस तरह के साहित्यिक आयोजनों को निरंतर आयोजित करने का संकल्प लिया।

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