RANCHI
कृषि, पशुपालन एवं सहकारिता मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने कहा है कि सरकार के कार्यकाल के लगभग चार वर्ष अभी शेष हैं और किसानों से किए गए सभी चुनावी वादों को पूरा किया जाएगा। धान के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) को लेकर उठे सवाल पर उन्होंने केंद्र सरकार पर सवाल खड़े किए। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश, हरियाणा समेत कई राज्यों ने एमएसपी बढ़ाने की मांग की थी, जिसमें झारखंड भी शामिल था, लेकिन मांग के अनुरूप बढ़ोतरी नहीं की गई।
उन्होंने कहा कि राज्य सरकार बोनस दे सकती है, परंतु धान उत्पादन के बाद केंद्र द्वारा खरीद सुनिश्चित होना भी आवश्यक है। उन्होंने उदाहरण देते हुए कहा कि छत्तीसगढ़ में पूर्ववर्ती सरकार ने धान पर लगभग 700 रुपये प्रति क्विंटल बोनस दिया था, लेकिन वहां भी एफसीआई ने धान की खरीद नहीं की।
मंत्री विभाग की 2534.23 करोड़ रुपये की अनुदान मांगों पर हुई चर्चा का जवाब दे रही थीं, जिसे बाद में ध्वनि मत से पारित कर दिया गया।
शिल्पी नेहा तिर्की ने बताया कि उनके विभाग ने अब तक राज्य मद का 65 प्रतिशत और केंद्रांश का 67 प्रतिशत खर्च किया है, जो मार्च तक 80 से 90 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। मिलेट मिशन के तहत 21,800 किसानों को लगभग 10 करोड़ रुपये डीबीटी के माध्यम से दिए गए हैं। मडुआ का रकबा दो वर्षों में 20 हजार हेक्टेयर से बढ़कर एक लाख हेक्टेयर हो गया है।
सिंचाई सुविधा 8 हजार हेक्टेयर क्षेत्र में उपलब्ध कराई गई है और 4 हजार से अधिक सोलर पंप लगाए गए हैं। दुग्ध संग्रह 400 लीटर प्रतिदिन से बढ़कर 3 लाख लीटर प्रतिदिन पहुंच गया है। मत्स्य उत्पादन 3 लाख मीट्रिक टन तक पहुंच चुका है तथा देसी मांगुर को राज्य मछली घोषित किया गया है।
बेकन फैक्ट्री को पुनः शुरू करने के लिए आईसीएआर-आईएमआर के साथ समझौता हुआ है। करंज बीज से सतत विमानन ईंधन पर भी कार्य जारी है। अगले वर्ष महिला किसान खुशहाली योजना, प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में कोल्ड स्टोरेज, दलहन मिशन और मखाना विकास योजना शुरू करने की घोषणा की गई है।
प्रश्नकाल के दौरान अमित कुमार यादव ने बीज क्रय का मुद्दा उठाया। उन्होंने चतरा, लातेहार, पश्चिमी सिंहभूम और हजारीबाग सहित 10 जिलों के बीज ग्राम केंद्रों से बीज नहीं खरीदे जाने की बात कही। उनका कहना था कि दिसंबर 2024 में झारखंड राज्य कृषि विकास निगम के साथ एमओयू होने के बावजूद बीज की खरीद नहीं हो रही, जिससे तैयार बीज खराब हो रहे हैं।
इस पर मंत्री ने स्पष्ट किया कि एमओयू में गुणवत्ता संबंधी शर्तें रखी गई हैं। यदि उनका पालन नहीं होगा तो बीज खरीद संभव नहीं है। यह समझौता परीक्षण आधार पर किया गया था और अगले दो महीनों में निगम अपने स्तर पर बीज ग्रामों से खरीद की प्रक्रिया आगे बढ़ाएगा।

