वाराणसी
गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर घोषित पद्मश्री पुरस्कारों में इस बार उत्तर प्रदेश की कई विभूतियों को सम्मानित किया गया है। इसी सूची में काशी हिंदू विश्वविद्यालय की सेवानिवृत्त प्रोफेसर और प्रेरणादायक संगीतकार मंगला कपूर का नाम भी शामिल है। एसिड अटैक सर्वाइवर के रूप में देशभर में अपनी अलग पहचान बना चुकी मंगला कपूर को पद्मश्री मिलने से वे बेहद भावुक और खुश हैं।
एक बातचीत में मंगला कपूर ने बताया कि जब उन्हें फोन पर इस सम्मान की सूचना मिली तो वे कुछ देर तक यकीन ही नहीं कर पाईं। उन्होंने कहा कि वर्षों तक चले संघर्ष और कठिन परिस्थितियों के बाद यह पल उनके लिए बेहद खास है। उनके अनुसार, परिवार विशेषकर उनके भाई का सहयोग उनके जीवन की सबसे बड़ी ताकत रहा है।
मंगला कपूर ने बताया कि मात्र 12 वर्ष की उम्र में वे एसिड अटैक की शिकार हुई थीं। इसके बाद छह वर्षों तक उनका इलाज चला और शरीर पर 36 सर्जरी हुईं। इलाज के बाद असली चुनौती समाज का सामना करना था, जहां लोग उन्हें सहज रूप से स्वीकार करने को तैयार नहीं थे। इसी दौर में संगीत उनके जीवन का सहारा बना।
उन्होंने संगीत में शिक्षा प्राप्त की और इसी क्षेत्र में आगे की पढ़ाई कर काशी हिंदू विश्वविद्यालय में शिक्षक के रूप में लंबे समय तक सेवाएं दीं। इसके साथ ही उन्होंने अपने जीवन संघर्ष पर आधारित ‘सीरत’ नामक पुस्तक भी लिखी, जिसने उन्हें समाज में नई पहचान दिलाई। पुस्तक के प्रकाशन के बाद लोग उनसे जुड़ने लगे और उन्होंने कई मंचों से अपने अनुभव साझा किए।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सराहना करते हुए मंगला कपूर ने कहा कि ‘विकलांग’ के स्थान पर ‘दिव्यांग’ शब्द का प्रयोग समाज की सोच बदलने वाला कदम है। उन्होंने कहा कि स्वयं कष्ट सहने के कारण वे समझती हैं कि शब्दों का मनोबल पर कितना असर पड़ता है और ‘दिव्यांग’ शब्द ने लाखों लोगों को आत्मसम्मान और नई ऊर्जा दी है।
मंगला कपूर का मानना है कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि उन सभी लोगों का है जो कठिन परिस्थितियों में भी हार नहीं मानते और अपने हौसले से नई राह बनाते हैं।

