RANCHI
विद्या भारती के राष्ट्रीय महामंत्री देशराज शर्मा ने रांची के कृष्ण चंद्र गांधी शैक्षिक नगर स्थित आदित्य प्रकाश जालान शिक्षक प्रशिक्षण महाविद्यालय, कुदलुम में आयोजित दो दिवसीय प्रचार और अभिलेखागार विभाग की बैठक को संबोधित किया। इस बैठक में देशभर के 11 क्षेत्रों के लगभग 100 पदाधिकारी और कार्यकर्ता भाग ले रहे हैं।


देशराज शर्मा ने कहा कि विद्या भारती केवल विद्यालय संचालित करने वाला संगठन नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय शैक्षिक आंदोलन है। उन्होंने बताया कि देशभर में 684 जिलों में 12,000 औपचारिक विद्यालयों सहित कुल 24,000 विद्यालय विद्या भारती द्वारा संचालित हैं। शिशु विद्या मंदिरों के माध्यम से शिक्षा के साथ-साथ समाज परिवर्तन और राष्ट्र निर्माण का कार्य भी किया जा रहा है।

उन्होंने यह भी कहा कि प्रचार और अभिलेखागार विभाग की सक्रियता से विद्यालयों की प्रमाणिकता बढ़ेगी और प्रामाणिक तथ्य एवं नैतिक अभिलेख के आधार पर शिक्षा के माध्यम से राष्ट्र निर्माण का भाव समाज में जागृत होगा।
इस अवसर पर प्रचार विभाग के अखिल भारतीय संयोजक सुधाकर रेड्डी ने राष्ट्रीय गतिविधियों की जानकारी दी। प्रचार प्रसार विभाग के अखिल भारतीय प्रमुख डॉ. सौरभ मालवीय ने पत्रिकाओं के महत्व पर प्रकाश डाला। बैठक के विभिन्न सत्रों में डॉ. नरेंद्र कुमार, डॉ. ललित बिहारी गोस्वामी, राजेंद्र सिंह बघेल, डॉ. उमेश कुमार वर्मा सहित अन्य प्रमुख वक्ताओं ने अपने विचार साझा किए। बैठक के प्रथम दिन कुल 5 सत्र संपन्न हुए और सत्रों का संचालन डॉ. रामकुमार भावसार ने किया।
विभिन्न पत्रिकाओं का विमोचन
बैठक के दौरान देशभर के विभिन्न प्रदेशों और विद्यालयों द्वारा प्रकाशित कई पत्रिकाओं का विमोचन भी किया गया। इसमें विद्या भारती झारखंड की वार्षिक पत्रिका उत्सर्ग, रांची विभाग अभिलेखागार साहित्य, दक्षिण बिहार प्रांत अभिलेखागार साहित्य, झारखंड की विद्या पत्रिका, उत्तर प्रदेश लखनऊ की शिशु मंदिर संदेश, दक्षिण बिहार की वार्षिक अर्चना पत्रिका, उत्तर बिहार की अरुणोदय पत्रिका सहित अन्य कई पत्रिकाएं शामिल थीं।
प्रदर्शनी में दिखा प्रचार विभाग का कार्य
इस अवसर पर प्रदर्शनी का उद्घाटन भी किया गया, जिसमें विद्या भारती झारखंड के प्रचार विभाग की उपलब्धियों और गतिविधियों को प्रदर्शित किया गया। अखिल भारतीय अधिकारियों ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलित कर इसका शुभारंभ किया। प्रदर्शनी में भारतीय संस्कृति, संविधान, शैक्षणिक उपलब्धियां, खेलकूद और पूर्व छात्रों की उपलब्धियों को दिखाया गया, जिसने सभी को प्रभावित किया।
इस बैठक के माध्यम से विद्या भारती ने देशभर में शिक्षा के प्रचार-प्रसार और अभिलेखागार कार्यों को और प्रभावी बनाने का संकल्प दोहराया।

