नई दिल्ली, LIVE 7 TV-देश की कई यूनिवर्सिटियों के सेवारत और रिटायर्ड वाइस चांसलर, झारखंड की पूर्व पुलिस महानिदेशक और वरिष्ठ वकीलों के एक समूह ने भारत के चीफ जस्टिस सूर्यकांत को पत्र लिखकर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करने की मांग की है।
पत्र में कहा गया है कि दिल्ली के पूर्व सीएम अरविंद केजरीवाल ने आबकारी नीति से जुड़े मामले की सुनवाई कर रहीं जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर गंभीर आरोप लगाए हैं और अपने केस को दूसरी बेंच में ट्रांसफर करने की मांग की है। हस्ताक्षरकर्ताओं का मानना है कि इस तरह की मांग न्यायपालिका की गरिमा को कमजोर करती है और यह एक गलत परंपरा को बढ़ावा दे सकती है।
उन्होंने अपने पत्र में लिखा है कि किसी भी पक्षकार को यह अधिकार नहीं है कि वह तय करे कि उसका मामला किस जज के सामने सुना जाएगा। अदालतों की कार्यप्रणाली एक तय प्रक्रिया के तहत चलती है और उसमें हस्तक्षेप करना न्यायिक व्यवस्था के लिए उचित नहीं है। बिना ठोस सबूत के किसी न्यायाधीश पर पक्षपात का आरोप लगाना भी गंभीर मामला है और इससे न्यायपालिका की निष्पक्षता पर सवाल खड़े होते हैं।
पत्र में कहा गया है कि अगर इस तरह के व्यवहार को नजरअंदाज किया गया, तो यह आगे चलकर एक खतरनाक मिसाल बन सकता है। इससे भविष्य में अन्य लोग भी इसी तरह के आरोप लगाकर अपने मामलों को प्रभावित करने की कोशिश कर सकते हैं, जिससे न्याय व्यवस्था पर लोगों का भरोसा कमजोर हो सकता है।
हस्ताक्षरकर्ताओं ने चीफ जस्टिस से इस मामले में हस्तक्षेप करने और उचित कार्रवाई करने की मांग की है, ताकि न्यायपालिका की गरिमा और स्वतंत्रता बनी रहे। इस तरह के मामलों में समय रहते सख्त कदम उठाना जरूरी है, जिससे न्याय व्यवस्था पर जनता का विश्वास कायम रह सके।

