RANCHI
झारखंड विधानसभा में भूमि और पुनर्वास से जुड़े मुद्दे पर चर्चा के दौरान नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने सरकार को सुझाव दिया कि यदि कोई व्यक्ति अतिक्रमण कर घर बनाकर रह रहा है, लेकिन वास्तव में भूमिहीन है, तो उसे बिना वैकल्पिक व्यवस्था के बेघर नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि जिनके पास कहीं और जमीन नहीं है और जो अत्यंत गरीब हैं, उनके प्रति सरकार को मानवीय दृष्टिकोण अपनाना चाहिए।
मरांडी ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य गरीब परिवार अपने आवास के साथ-साथ पशुपालन भी करते हैं। ऐसे में उन्हें केवल न्यूनतम भूमि देने के बजाय इतनी जमीन उपलब्ध कराई जानी चाहिए, जिससे वे पशु-पक्षी रखने के साथ-साथ सब्जी आदि की खेती भी कर सकें। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जिन लोगों के पास पहले से जमीन है और जिन्होंने जानबूझकर वन या सरकारी भूमि पर कब्जा किया है, उनका मामला अलग है।
विभागीय मंत्री दीपक बिरुआ ने जवाब देते हुए कहा कि सरकार नियमानुसार सीमित दायरे में भूमि बंदोबस्त कर सकती है, लेकिन जबरन कब्जा करने वालों को नियमित करने का कोई प्रावधान नहीं है।
यह मामला राजद विधायक प्रकाश राम द्वारा उठाए गए ध्यानाकर्षण प्रस्ताव के दौरान सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि लातेहार जिले के चंदनडीह क्षेत्र में दशकों से बसे सैकड़ों गरीब परिवारों को हटाया जा रहा है। उनका कहना था कि पुनर्वास की समुचित व्यवस्था किए बिना बेदखली उचित नहीं है।
प्रकाश राम ने यह भी कहा कि पहले हटाए गए कुछ परिवारों को वैकल्पिक जमीन दी गई है, लेकिन वह स्थान स्थानीय धार्मिक और सामाजिक गतिविधियों से जुड़ा होने के कारण उपयुक्त नहीं माना जा रहा। उन्होंने शेष भूमिहीन परिवारों के पुनर्वास की भी मांग की।
मंत्री ने आश्वासन दिया कि मामले की जांच उपायुक्त के माध्यम से कराई जाएगी और आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।

