सेबी का ब्रोकर्स, पोर्टफोलियो मैनेजर्स और म्यूचुअल फंड्स को सख्त निर्देश, सोशल मीडिया पर पंजीकरण की स्पष्ट जानकारी दें

Shashi Bhushan Kumar
SEBI.

मुंबई। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड ने सभी विनियमित संस्थाओं को निर्देश दिया है कि वे सोशल मीडिया पर प्रतिभूति बाजार से जुड़ी कोई भी सामग्री साझा करते समय अपना पंजीकृत नाम और पंजीकरण संख्या स्पष्ट रूप से प्रदर्शित करें। यह व्यवस्था 1 मई से प्रभावी होगी।

यह निर्देश स्टॉक ब्रोकरों, पोर्टफोलियो प्रबंधकों, म्यूचुअल फंडों, वितरकों तथा अन्य मध्यस्थों और एजेंटों पर लागू होगा। नियामक के अनुसार, इसका उद्देश्य निवेशकों को यह पहचानने में सहायता देना है कि कौन-सी सामग्री पंजीकृत और विनियमित संस्थाओं द्वारा जारी की गई है और कौन-सी अपंजीकृत स्रोतों से।

परिपत्र में कहा गया है कि यह नियम प्रतिभूति बाजार से संबंधित सभी प्रकार की सामग्री—वीडियो, लिखित पोस्ट या अन्य डिजिटल प्रकाशनों—पर लागू होगा। यह व्यवस्था यूट्यूब, टेलीग्राम, इंस्टाग्राम, फेसबुक, व्हाट्सएप, एक्स, लिंक्डइन, रेडिट और थ्रेड्स सहित सभी सोशल मीडिया मंचों पर प्रभावी रहेगी।

निर्देश के अनुसार, विनियमित संस्थाओं और उनके एजेंटों को अपने सोशल मीडिया हैंडल के मुख्य पृष्ठ पर पंजीकृत नाम और पंजीकरण संख्या प्रमुखता से दर्शानी होगी। साथ ही, बाजार संबंधी प्रत्येक पोस्ट या वीडियो की शुरुआत में भी इन विवरणों का उल्लेख करना आवश्यक होगा।

नियामक ने बताया कि हाल के वर्षों में सोशल मीडिया के माध्यम से समन्वित शेयर हेरफेर और ‘पंप-एंड-डंप’ जैसी योजनाओं के मामले सामने आए हैं, जिन पर कार्रवाई की गई है। स्पष्ट पहचान की व्यवस्था से निवेशकों को भ्रामक जानकारी से बचने और सूचित निर्णय लेने में मदद मिलने की उम्मीद है।

जिन संस्थाओं के पास एक से अधिक पंजीकरण हैं, उन्हें अपने सोशल मीडिया पृष्ठ पर एक वेब लिंक उपलब्ध कराना होगा, जहां उनके सभी पंजीकृत नाम और पंजीकरण संख्याएं सूचीबद्ध हों। साथ ही, यह भी स्पष्ट करना होगा कि संबंधित सामग्री किस पंजीकरण के अंतर्गत प्रकाशित की जा रही है।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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