पश्चिम बंगाल एसआईआर: कलकत्ता हाईकोर्ट ने ओडिशा और झारखंड से 200 न्यायिक अधिकारियों की मांग की

Shashi Bhushan Kumar
Calcutta High Court.

कोलकाता। पश्चिम बंगाल में चल रही विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) प्रक्रिया को तेज करने के लिए कलकत्ता हाईकोर्ट ने ओडिशा और झारखंड से 200 न्यायिक अधिकारियों की मांग की है। प्रस्ताव के अनुसार 100-100 अधिकारी ओडिशा हाईकोर्ट और झारखंड हाईकोर्ट से लिए जाएंगे। इन अधिकारियों को उन मामलों की जांच और निर्णय के लिए नियुक्त टीम में शामिल किया जाएगा, जिन्हें “तार्किक असंगति” श्रेणी में चिह्नित किया गया है।

यह फैसला मुख्य न्यायाधीश सुजॉय पॉल की अध्यक्षता में हुई उच्चस्तरीय बैठक में लिया गया। बैठक में राज्य के मुख्य निर्वाचन अधिकारी, मुख्य सचिव, कार्यवाहक पुलिस महानिदेशक, कोलकाता पुलिस आयुक्त और विशेष रोल पर्यवेक्षक सहित कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया की खंडपीठ ने 24 फरवरी को झारखंड और ओडिशा के उच्च न्यायालयों से न्यायिक अधिकारियों को पश्चिम बंगाल भेजने की अनुमति दी थी, ताकि मतदाताओं के दावों और आपत्तियों के निपटारे में तेजी लाई जा सके।

बैठक में यह भी तय किया गया कि 21 फरवरी की मध्यरात्रि तक चिन्हित “तार्किक असंगति” मामलों को अंतिम आधार माना जाएगा। पश्चिम बंगाल की विभिन्न अदालतों से पहले ही 532 न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति की जा चुकी है, जिनमें से 273 अधिकारी वर्तमान में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं।

अतिरिक्त 200 अधिकारियों के जुड़ने से दस्तावेजों की जांच प्रक्रिया में और तेजी आने की संभावना है। अंतिम मतदाता सूची, न्यायिक जांच के लिए भेजे गए मामलों को छोड़कर प्रकाशित की जाएगी, जबकि लंबित मामलों की प्रगति के अनुसार पूरक सूची बाद में जारी की जाएगी।

न्यायिक अधिकारी जांच की दैनिक प्रगति रिपोर्ट हाईकोर्ट को सौंप रहे हैं, ताकि पूरी प्रक्रिया निर्धारित समयसीमा के भीतर संपन्न हो सके।

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शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
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