‘द केरल स्टोरी’ ने दिया समाज को रियलिटी चेक, इसलिए लोगों को चुभ रही फिल्म- भाजपा

Shashi Bhushan Kumar

फिल्म ‘द केरल स्टोरी 2: गोज बियॉन्ड’ को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। ट्रेलर जारी होने के बाद से ही फिल्म चर्चा और विवाद दोनों का केंद्र बनी हुई है। विभिन्न दलों के नेताओं ने इस मुद्दे पर अपनी-अपनी प्रतिक्रियाएं दी हैं, जबकि मामला अदालत में विचाराधीन है।

भाजपा प्रवक्ता प्रतुल शाह देव ने फिल्म का समर्थन करते हुए कहा कि यह समाज के सामने कुछ गंभीर मुद्दों को उजागर करती है। उनके अनुसार, राज्य में कथित रूप से कुछ कट्टरपंथी समूहों द्वारा युवतियों को निशाना बनाए जाने के आरोप पहले भी सामने आते रहे हैं। उन्होंने इसे एक संगठित अपराध की तरह पेश करते हुए कहा कि फिल्म ने समाज को “रियलिटी चेक” दिया है।

दूसरी ओर, कांग्रेस नेता उदित राज ने इस पर अलग दृष्टिकोण रखा। उन्होंने कहा कि यदि सरकार विवादित विषयों पर आधारित फिल्मों को समर्थन देती है तो इससे व्यापक सामाजिक समस्याओं का समाधान नहीं होता। उनका मानना है कि अंतरजातीय विवाह और सामाजिक सुधार जैसे कदम लंबे समय में धार्मिक और सामाजिक तनाव से जुड़े मुद्दों को कम कर सकते हैं। उन्होंने हाल में जारी यूजीसी दिशानिर्देशों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में मूल कारणों पर ध्यान देने की आवश्यकता है।

झारखंड सरकार के एक मंत्री इरफान अंसारी ने फिल्म पर आपत्ति जताते हुए राज्य में इसके प्रदर्शन पर रोक लगाने की मांग की। उनका कहना है कि ऐसी फिल्मों से सामाजिक सौहार्द प्रभावित हो सकता है।

इसी बीच, फिल्म को मिले सेंसर प्रमाणपत्र को चुनौती देते हुए केरल हाईकोर्ट में याचिका दायर की गई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि फिल्म राज्य की छवि को नकारात्मक रूप में प्रस्तुत करती है। अदालत ने इस मामले में संबंधित पक्षों को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।

फिलहाल यह मुद्दा राजनीतिक और कानूनी दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है।

Share This Article
शशी भूषण कुमार | पत्रकार (Journalist)- शशी भूषण कुमार 12+ वर्षों के अनुभव वाले पत्रकार हैं। प्रिंट, इलेक्ट्रॉनिक और डिजिटल मीडिया में कार्य करते हुए वर्तमान में Live 7 TV.com में सीनियर प्रोड्यूसर के रूप में संपादकीय नेतृत्व और न्यूज़ प्लानिंग की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। वे पिछले तीन वर्षों से झारखंड स्टेट ओपन यूनिवर्सिटी में पत्रकारिता विभाग के गेस्ट फैकल्टी भी हैं। ग्रामीण पत्रकारिता पर शोध कार्य से जुड़े रहते हुए वे जमीनी और आदिवासी क्षेत्रों की आवाज़ को मुख्यधारा तक पहुँचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
Leave a Comment