नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने एक्सपोर्ट प्रमोशन मिशन के तहत सात नई पहलों की शुरुआत की है। इस पहल का उद्देश्य सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बनाने और निर्यात क्षमता को मजबूत करना है।
इन कदमों को भारतीय निर्यातकों के सामने मौजूद प्रमुख चुनौतियों के समाधान के लिए तैयार किया गया है, ताकि निर्यात वृद्धि को व्यापक और समावेशी बनाया जा सके। मंत्री ने कहा कि भारत विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ आत्मविश्वास से व्यापारिक संबंध बढ़ा रहा है और प्रतिस्पर्धी क्षेत्रों में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है।
उन्होंने बताया कि इस मिशन का लक्ष्य नए उत्पादों, सेवाओं और नए निर्यातकों को बढ़ावा देना है, साथ ही भारतीय कंपनियों को नए अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंच दिलाना है। फरवरी के पहले पखवाड़े में माल निर्यात में दो अंकों की वृद्धि दर्ज होने का उल्लेख करते हुए उन्होंने इसे उद्योग के बढ़ते विश्वास का संकेत बताया।
मिशन के तहत एमएसएमई के लिए प्रक्रियाओं को सरल बनाने, ऋण सुविधा तक पहुंच बढ़ाने, गुणवत्ता मानकों को सुदृढ़ करने और अंतरराष्ट्रीय नियमों के अनुपालन में सहायता देने की व्यवस्था की जाएगी। साथ ही लॉजिस्टिक्स और वेयरहाउसिंग ढांचे को मजबूत किया जाएगा। दुबई में प्रस्तावित ‘भारत मार्ट’ जैसी पहल से भारतीय निर्यातकों को खाड़ी देशों, अफ्रीका, मध्य एशिया और यूरोप के बाजारों तक बेहतर पहुंच मिल सकेगी।
यह मिशन वाणिज्य विभाग द्वारा एमएसएमई मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, भारतीय निर्यात-आयात बैंक, सीजीटीएमएसई, एनसीजीटीसी, बैंकों तथा विदेशों में भारतीय मिशनों के सहयोग से लागू किया जा रहा है।
नई पहलों का उद्देश्य पूंजी की ऊंची लागत, व्यापार वित्त की सीमाएं, अंतरराष्ट्रीय अनुपालन की जटिलताएं और नए बाजारों में प्रवेश की बाधाओं जैसी संरचनात्मक समस्याओं को दूर करना है।
मंत्री ने यह भी कहा कि मुक्त व्यापार समझौतों के बढ़ते नेटवर्क से भारतीय निर्यातकों को व्यापक बाजार पहुंच मिली है। उनके अनुसार, विभिन्न समझौतों के माध्यम से भारत को वैश्विक अर्थव्यवस्था और व्यापार में अधिक हिस्सेदारी सुनिश्चित करने का अवसर मिल रहा है।

