हैदराबाद: प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने तिरुपति लड्डू में कथित मिलावट से जुड़े मामले में मनी लॉन्ड्रिंग के आरोपों की जांच शुरू कर दी है। एजेंसी ने इस संबंध में प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (पीएमएलए) के तहत एक ईसीआईआर दर्ज की है।
सूत्रों के मुताबिक, ईडी ने सीबीआई की विशेष जांच टीम (एसआईटी) द्वारा दायर चार्जशीट के आधार पर यह कार्रवाई की है। आरोप है कि कुछ निजी डेयरी कंपनियों और बिचौलियों ने घी की आपूर्ति के टेंडर और गुणवत्ता जांच को प्रभावित करने के लिए तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के अधिकारियों को हवाला चैनलों के जरिए रिश्वत दी। ईडी अब पूरे मामले में वित्तीय लेन-देन और हवाला नेटवर्क की भूमिका की जांच कर रही है।
एसआईटी ने 23 जनवरी 2026 को नेल्लोर की एक अदालत में चार्जशीट दाखिल की थी, जिसमें डेयरी कंपनियों के निदेशकों सहित कुल 36 लोगों को आरोपी बनाया गया है। जांच में सामने आया है कि कथित तौर पर 250 करोड़ रुपये के लेन-देन के लिए शेल कंपनियों का इस्तेमाल किया गया।
आरोप है कि टीटीडी के कुछ अधिकारियों को वनस्पति तेल और रसायनों के मिश्रण को शुद्ध घी बताकर लड्डू बनाने में इस्तेमाल करने की अनुमति देने के लिए रिश्वत दी गई। ईडी की जांच आंध्र प्रदेश सरकार द्वारा गठित एक सदस्यीय समिति की घोषणा के बाद शुरू हुई है, जिसे एसआईटी रिपोर्ट की समीक्षा कर प्रशासनिक कार्रवाई की सिफारिश करनी है।
मुख्यमंत्री एन. चंद्रबाबू नायडू ने 5 फरवरी को कहा था कि समिति मामले की खामियों की पहचान करेगी और जिम्मेदारी तय करेगी। उन्होंने कहा कि समीक्षा पूरी होने के बाद सरकार उचित कदम उठाएगी।
यह कथित मिलावट 2019 से 2024 के बीच हुई बताई जा रही है, जब राज्य में वाईएसआर कांग्रेस पार्टी सत्ता में थी। चार्जशीट दाखिल होने के बाद वाईएसआरसीपी ने दावा किया कि एसआईटी ने उसे क्लीन चिट दे दी है, क्योंकि रिपोर्ट में पशु चर्बी की मिलावट की पुष्टि नहीं हुई थी। हालांकि, मुख्यमंत्री नायडू ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि किसी भी रिपोर्ट ने वाईएसआरसीपी को पूरी तरह बरी नहीं किया है।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि लड्डू बनाने में इस्तेमाल घी में बाथरूम क्लीनर जैसे रसायनों का उपयोग किया गया था, जिसे उन्होंने श्रद्धालुओं की आस्था के साथ गंभीर खिलवाड़ बताया।

