रांची/जामताड़ा
दिवंगत आदिवासी नेता और झारखंड आंदोलन के अग्रदूत रहे शिबू सोरेन को पद्म भूषण सम्मान दिए जाने पर झारखंड की राजनीति में अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। जहां मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने इस सम्मान का स्वागत किया है, वहीं राज्य सरकार में मंत्री इरफान अंसारी ने कहा है कि गुरुजी को वह सम्मान नहीं मिला है, जिसके वे वास्तविक रूप से हकदार थे।
जामताड़ा में मीडिया से बातचीत करते हुए इरफान अंसारी ने कहा कि शिबू सोरेन का योगदान केवल झारखंड तक सीमित नहीं रहा, बल्कि उनका संघर्ष राष्ट्रीय स्तर पर आदिवासी अधिकारों और सामाजिक न्याय के लिए प्रेरणास्रोत रहा है। उन्होंने कहा कि ऐसे नेता को भारत रत्न से सम्मानित किया जाना चाहिए था।
उन्होंने यह भी कहा कि गुरुजी के बलिदानों और योगदानों की तुलना अन्य व्यक्तित्वों से करना निराशाजनक है और इससे उनके संघर्ष की गंभीरता कम नहीं की जानी चाहिए।
वहीं रांची में वरिष्ठ भाजपा नेता अर्जुन मुंडा ने इस सम्मान का समर्थन करते हुए कहा कि यह सम्मान शिबू सोरेन के संघर्षों और उनके जीवन के प्रति देश की कृतज्ञता को दर्शाता है। उन्होंने कहा कि सम्मान का मूल्य उसके आकार से नहीं, बल्कि उसके भाव और उद्देश्य से तय होता है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने 25 जनवरी को शिबू सोरेन को मरणोपरांत पद्म भूषण सम्मान देने की घोषणा की थी। इसके बाद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन ने सोशल मीडिया के माध्यम से केंद्र सरकार के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा था कि गुरुजी का जीवन राजनीतिक सीमाओं से परे सामाजिक न्याय, आदिवासी अस्मिता, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण और शोषित-वंचित वर्गों के अधिकारों के लिए समर्पित रहा।
उन्होंने यह भी कहा था कि शिबू सोरेन का संघर्ष ही वह आधार बना, जिससे झारखंड को अलग राज्य का दर्जा मिला और झारखंडवासियों को अपनी पहचान पर गर्व करने का अवसर मिला।

