झारखंड में लगातार सामने आ रहे बच्चा अपहरण के मामलों के बीच अपहृत बच्चों की सकुशल बरामदगी को लेकर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष एवं सांसद आदित्य साहू ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि अंश और अंशिका के बाद राज्य के विभिन्न इलाकों से 12 अपहृत बच्चों तथा सिलदिरी, शंकरघाट के 12 वर्षीय कन्हैया कुमार की बरामदगी भाजपा के प्रचंड दबाव और आंदोलन का प्रत्यक्ष परिणाम है। यदि भाजपा सड़क पर नहीं उतरती, तो आज कई माताओं की गोद सूनी रह जाती।
आदित्य साहू ने कहा कि बरामद किए गए सभी बच्चे गरीब और किसान परिवारों से हैं। ऐसे परिवार, जो न तो प्रशासनिक दफ्तरों तक अपनी आवाज मजबूती से पहुंचा पाते हैं और न ही लंबे समय तक संघर्ष करने की स्थिति में होते हैं। उन्होंने कहा कि जब किसी गरीब परिवार का बच्चा लापता हो जाता है, तो माता-पिता महीनों तक गहरे मानसिक तनाव, भय और पीड़ा में जीते हैं। कई बार परिजन रो-बिलखकर कुछ दिनों बाद किस्मत के भरोसे बैठ जाते हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि उनकी कोई सुनवाई नहीं होगी।
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य पुलिस को बच्चों की बरामदगी पर बधाई देते हुए कहा कि पुलिस का धर्म जनता का सहारा बनना है, गरीबों और असहायों की रक्षा करना है। लेकिन जिस तरह से महीनों तक राज्य में बच्चा अपहरण गिरोह सक्रिय रहे और सैकड़ों बच्चे लापता हुए, उससे साफ है कि पुलिस पहले सक्रिय नहीं थी। यदि समय रहते कार्रवाई होती, तो इतने बड़े पैमाने पर बच्चों का अपहरण नहीं होता।
उन्होंने कहा कि झारखंड पहले से ही बाल तस्करी के मामलों से प्रभावित राज्य रहा है। इसके बावजूद प्रशासन की सुस्ती ने अपहरण गिरोहों को खुला खेल खेलने का मौका दिया। पकड़े गए बच्चा अपहरण गिरोहों से यदि सख्ती से पूछताछ की जाए और कठोर कानूनी कार्रवाई हो, तो अब भी सैकड़ों लापता बच्चों का पता लगाया जा सकता है।
आदित्य साहू ने इस बात पर भी जोर दिया कि जिन परिवारों के बच्चे अपहृत हुए हैं, उन्हें केवल बच्चा लौटाना ही पर्याप्त नहीं है। राज्य सरकार को मानवीय संवेदनाओं के तहत माता-पिता की चिकित्सा जांच करानी चाहिए, क्योंकि वे लंबे समय तक मानसिक तनाव में रहे हैं। इसके साथ ही बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और परिवार की आजीविका को देखते हुए आर्थिक सहायता भी दी जानी चाहिए।
उन्होंने प्रशासन से अपील की कि यह अभियान यहीं न रुके। जमशेदपुर से अपहृत व्यवसायी पुत्र कैरव गांधी और तिलैया से लापता बच्चे को भी अविलंब बरामद किया जाए। आदित्य साहू ने भाजपा कार्यकर्ताओं का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि उनके निरंतर आंदोलन, दबाव और प्रयासों के कारण ही प्रशासन हरकत में आया और बच्चों की जान बच सकी।
उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि बच्चों की सुरक्षा केवल एक राजनीतिक मुद्दा नहीं, बल्कि मानवीय और सामाजिक जिम्मेदारी है। जब तक झारखंड का हर बच्चा सुरक्षित नहीं होगा, तब तक भाजपा का संघर्ष जारी रहेगा।

