रांची।
पड़हा राजा और आदिवासी नेता सोमा मुंडा की निर्मम हत्या के विरोध में शनिवार को विभिन्न आदिवासी संगठनों द्वारा पूर्व घोषित झारखंड बंद का राजधानी रांची समेत राज्य के कई हिस्सों में व्यापक असर देखने को मिला। केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा के नेतृत्व में राजधानी के अल्बर्ट एक्का चौक पर हजारों कार्यकर्ता एकत्र हुए और शांतिपूर्ण तरीके से झारखंड बंद को सफल बनाया।
प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष बबलू मुंडा ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि “अबुवा दिसुम, अबुवा राज” का नारा देने वाली हेमंत सोरेन सरकार आदिवासियों के हितों की रक्षा करने में पूरी तरह विफल रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस सरकार के कार्यकाल में लगातार आदिवासी समाज के प्रतिष्ठित लोगों की हत्याएं हुई हैं, लेकिन सरकार और प्रशासन मूकदर्शक बने हुए हैं।
बबलू मुंडा ने कहा कि पड़हा राजा सोमा मुंडा के अलावा समाजसेवी सुभाष मुंडा, रूपा तिर्की, अनिल टाइगर, विजय मुंडू, जीतराम मुंडा, सूर्या हांसदा, संध्या टोपनो, तारापद महतो जैसे कई आदिवासी नेताओं और सामाजिक कार्यकर्ताओं की हत्या हुई, लेकिन किसी भी मामले में सरकार ने ठोस कार्रवाई नहीं की। उन्होंने इसे आदिवासी विरोधी रवैया करार देते हुए कहा कि एक आदिवासी मुख्यमंत्री का इन मामलों में चुप रहना बेहद दुर्भाग्यपूर्ण और पीड़ादायक है।
उन्होंने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर भी सवाल उठाए। बबलू मुंडा ने कहा कि जब धुर्वा क्षेत्र में बच्चों की गुमशुदगी होती है, तो पूरे प्रशासनिक तंत्र को सक्रिय कर दिया जाता है, लेकिन जब झारखंड के “राज्य के मालिक” कहे जाने वाले पड़हा राजा सोमा मुंडा की दिनदहाड़े हत्या कर दी जाती है, तो सरकार और प्रशासन मामले को दबाने और लीपापोती करने में जुट जाते हैं। उन्होंने इसे दोहरा मापदंड बताया।
केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष ने मांग की कि सोमा मुंडा हत्याकांड की जांच केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से कराई जाए। साथ ही, गोली मारकर हत्या करने वाले अपराधियों की तत्काल गिरफ्तारी कर उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दिलाई जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सरकार ने इस मामले में जल्द न्याय नहीं दिलाया, तो आदिवासी समाज और संगठनों का आंदोलन और तेज किया जाएगा।
झारखंड बंद के दौरान राजधानी रांची में कई जगहों पर दुकानें बंद रहीं और यातायात भी आंशिक रूप से प्रभावित रहा। हालांकि प्रदर्शन पूरी तरह शांतिपूर्ण रहा और कहीं से किसी अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। पुलिस-प्रशासन भी स्थिति पर नजर बनाए हुए था।
इस आंदोलन में चडरी सरना समिति के महासचिव सुरेंद्र लिंडा, केंद्रीय सरना समिति के महासचिव महादेव टोप्पो, झारखंड आंदोलनकारी कुमुद वर्मा, एदलहातु सरना समिति के महासचिव मुकेश मुंडा, आदिवासी छात्र संघ के अध्यक्ष विवेक तिर्की सहित बड़ी संख्या में सामाजिक कार्यकर्ता, छात्र और युवा शामिल हुए।
आदिवासी संगठनों ने स्पष्ट किया कि यह आंदोलन सिर्फ एक व्यक्ति की हत्या का नहीं, बल्कि आदिवासी अस्मिता, सम्मान और न्याय की लड़ाई है। जब तक सोमा मुंडा के हत्यारों को सजा नहीं मिलती और आदिवासियों को न्याय नहीं मिलता, तब तक संघर्ष जारी रहेगा।

