नई दिल्ली: लोकपाल ने झारखंड के गोड्डा से भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति से जुड़ी शिकायत को खारिज कर दिया है। यह शिकायत सामाजिक कार्यकर्ता अमिताभ ठाकुर द्वारा दायर की गई थी। लोकपाल की जस्टिस ए.एम. खानविलकर की अध्यक्षता वाली पीठ ने अपने विस्तृत आदेश में आरोपों को निराधार, तुच्छ और परेशान करने वाला करार दिया।

लोकपाल ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि शिकायत का अधिकांश हिस्सा सांसद की पत्नी की संपत्तियों पर केंद्रित था, जबकि लोकपाल का अधिकार क्षेत्र केवल सार्वजनिक पद पर आसीन व्यक्ति तक सीमित है। जांच के दौरान यह पाया गया कि सांसद निशिकांत दुबे की स्वयं की संपत्ति में कोई असामान्य या आय से अधिक वृद्धि के ठोस प्रमाण नहीं मिले हैं।

शिकायत में वर्ष 2009 से 2024 तक दाखिल चुनावी हलफनामों का हवाला देते हुए संपत्ति में कथित बढ़ोतरी का दावा किया गया था। हालांकि, लोकपाल की जांच में केवल मामूली बदलाव सामने आए, जिन्हें अवैध या संदिग्ध नहीं माना गया।
आदेश में लोकपाल ने शिकायतकर्ता अमिताभ ठाकुर की कार्यप्रणाली पर भी टिप्पणी की। कहा गया कि बिना समुचित जांच के सार्वजनिक दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाए गए, जिससे यह मामला व्यक्तिगत या राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित प्रतीत होता है। इसके साथ ही लोकपाल ने यह भी माना कि शिकायत को सोशल मीडिया पर सार्वजनिक कर गोपनीयता के नियमों का उल्लंघन किया गया।
लोकपाल ने अमिताभ ठाकुर को जारी कारण बताओ नोटिस को समाप्त कर दिया, लेकिन सांसद निशिकांत दुबे को गोपनीयता भंग और मानहानि के आधार पर कानूनी कार्रवाई करने की स्वतंत्रता प्रदान की है।
लोकपाल ने अपने फैसले में यह भी कहा कि सार्वजनिक जीवन में पारदर्शिता के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों की प्रतिष्ठा की रक्षा भी उतनी ही आवश्यक है। बिना ठोस साक्ष्य के की गई शिकायतें न केवल व्यवस्था पर बोझ डालती हैं, बल्कि लोकतांत्रिक संस्थाओं की विश्वसनीयता को भी प्रभावित करती हैं।

