भारतीय रिज़र्व बैंक, राँची कार्यालय में विश्व हिन्दी दिवस 2026 का भव्य आयोजन, हिन्दी–संस्कृति और नवचेतना का अनूठा संगम

Shashi Bhushan Kumar

भारतीय रिज़र्व बैंक, रांची कार्यालय ने क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन प्रसाद सिंह के नेतृत्व एवं मार्गदर्शन में सितंबर 2023 से लगातार अनेक अभिनव पहल, नवोन्मेषी अभियान और अनूठे कार्यक्रमों का सफल आयोजन कर राज्य को राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाई है। इन प्रयासों के परिणामस्वरूप झारखंड का ऋण-जमा अनुपात पहली बार 50 प्रतिशत से अधिक पहुँचा, वहीं जुलाई 2025 से आरंभ वित्तीय संतृप्ति अभियान में लगभग 50 प्रतिशत उपलब्धि के साथ राज्य देश के अग्रणी राज्यों में शामिल हुआ है।

इसके साथ-साथ हिन्दी के प्रगामी प्रयोग और जन-जन से संवाद को सशक्त बनाने के उद्देश्य से बीते ढाई वर्षों में ‘साहित्योत्सव’, ‘कविता और कथा महोत्सव’, ‘कथा अंतर्कथा’, ‘नवकथा अंतर्कथा’ जैसे विशिष्ट आयोजन किए गए। विद्यार्थियों, महिलाओं, बुज़ुर्गों और समाज के वंचित वर्गों को जागरूक एवं सशक्त बनाने के लिए प्रश्नोत्तरी, व्याख्यान सत्र, निबंध प्रतियोगिताएँ, व्याख्यान शृंखलाएँ और पूर्व क्षेत्र सांस्कृतिक संगम जैसे कार्यक्रमों को देश-विदेश तक सराहना मिली है।

इसी कड़ी में नये वर्ष की शुरुआत नयी सोच और सुदृष्टि के साथ करते हुए भारतीय रिज़र्व बैंक, रांची कार्यालय द्वारा 14 जनवरी 2025 को विश्व हिन्दी दिवस समारोह का भव्य और यादगार आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ, जिसे क्षेत्रीय निदेशक प्रेम रंजन प्रसाद सिंह एवं विशिष्ट अतिथियों ने संयुक्त रूप से संपन्न किया।

समारोह के दौरान पुरस्कृत कथा-नाटक ‘न खोली गई चिट्ठी’ का प्रभावशाली मंचन किया गया, जिसने माता-पिता के प्रति प्रेम, संवेदना और उपेक्षा के भावों को मार्मिक रूप से प्रस्तुत किया। इसके साथ ही काव्यपाठ और विश्व हिन्दी तथा उसके वैश्विक परिदृश्य पर सारगर्भित संवाद ने कार्यक्रम को बौद्धिक और सांस्कृतिक दृष्टि से समृद्ध बना दिया।

अपने संबोधन में क्षेत्रीय निदेशक ने विश्व हिन्दी दिवस के ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डालते हुए बताया कि हिन्दी का अंतरराष्ट्रीय सफर 10 जनवरी 1975 को नागपुर में आयोजित प्रथम विश्व हिन्दी सम्मेलन से प्रारंभ हुआ और वर्ष 2006 से इसे विश्व हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि हिन्दी केवल एक भाषा नहीं, बल्कि वैश्विक संवाद, संस्कृति और ज्ञान को जोड़ने वाला सेतु है। हिन्दी और कला के संबंध पर बोलते हुए उन्होंने साहित्य, संगीत, रंगमंच और सिनेमा की भूमिका को रेखांकित किया, जिसने हिन्दी को वैश्विक पहचान दिलाई है।

कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण रहे सुप्रसिद्ध अभिनेता एवं रंगकर्मी राजेन्द्र गुप्ता का काव्यपाठ और संवाद सत्र, जिसने श्रोताओं को गहराई से प्रभावित किया। समारोह के अंतिम चरण में आयोजित संगीत संध्या में प्रसिद्ध गायिका चंदन तिवारी एवं उनके साथियों ने गीत-संगीत की मनमोहक प्रस्तुतियाँ दीं।

पूरे आयोजन को उपस्थित जनसमूह ने भरपूर सराहा और भारतीय रिज़र्व बैंक, रांची कार्यालय की इस अभिनव एवं सांस्कृतिक पहल को विश्व हिन्दी दिवस पर एक प्रेरणादायी उदाहरण बताया।

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