RANCHI
छात्रवृत्ति भुगतान में हो रही देरी, अपूर्ण राशि जारी किए जाने और केंद्र सरकार की कथित उदासीनता के खिलाफ एनएसयूआई झारखंड ने शुक्रवार को राजभवन के समक्ष विरोध प्रदर्शन किया। यह आंदोलन एनएसयूआई झारखंड के प्रदेश प्रभारी चुन्नू सिंह और प्रदेश अध्यक्ष बिनय उरांव के नेतृत्व में आयोजित किया गया।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि केंद्र सरकार द्वारा समय पर केंद्रांश जारी नहीं किए जाने के कारण राज्य के हजारों छात्र-छात्राओं की छात्रवृत्ति लंबित है, जिससे उनकी पढ़ाई और भविष्य पर प्रतिकूल असर पड़ रहा है। एनएसयूआई का कहना है कि राज्य सरकार ने आवश्यक प्रक्रियाएं पूरी कर दी हैं, इसके बावजूद केंद्र स्तर पर देरी की जा रही है।
इस प्रदर्शन में कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेता और एनएसयूआई के प्रदेश एवं जिला स्तर के पदाधिकारी शामिल हुए। नेताओं ने कहा कि शैक्षणिक सत्र 2023-24, 2024-25 और 2025-26 की छात्रवृत्तियां अब तक लंबित हैं, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर छात्र पढ़ाई छोड़ने, कर्ज लेने और मानसिक दबाव में आने को मजबूर हैं।
एनएसयूआई झारखंड ने केंद्र सरकार पर छात्रवृत्ति भुगतान को लेकर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कहा कि बार-बार नीतिगत बदलाव और तकनीकी प्रक्रियाओं का हवाला देकर राशि जारी करने में टालमटोल किया जा रहा है। संगठन का यह भी कहना है कि उच्च शिक्षा से जुड़े मामलों में राज्यों के अधिकारों में अनावश्यक हस्तक्षेप संघीय ढांचे को कमजोर करता है।
प्रदेश प्रभारी चुन्नू सिंह ने कहा कि छात्रवृत्ति में देरी और कम राशि जारी करना केंद्र सरकार की बड़ी विफलता है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र केंद्रांश जारी नहीं किया गया, तो आंदोलन को और व्यापक रूप दिया जाएगा।
वहीं प्रदेश अध्यक्ष बिनय उरांव ने कहा कि छात्रवृत्ति कोई अनुदान नहीं, बल्कि छात्रों का अधिकार है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जल्द ही छात्रवृत्ति राशि जारी नहीं की गई, तो एनएसयूआई पूरे राज्य में चरणबद्ध और निर्णायक आंदोलन शुरू करेगी।
प्रदर्शन के दौरान संगठन ने छात्रहित से जुड़ी अन्य मांगें भी रखीं, जिनमें विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में छात्र संघ चुनाव कराना, स्थायी कुलपति व अन्य प्रमुख पदों पर नियुक्ति, शैक्षणिक कैलेंडर जारी करना और विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक व्यवस्था को सुदृढ़ करने जैसी मांगें शामिल हैं।
इस कार्यक्रम में बड़ी संख्या में एनएसयूआई कार्यकर्ता और छात्र मौजूद रहे, जिन्होंने छात्रवृत्ति भुगतान में जल्द समाधान की मांग की।

