नई दिल्ली। सरकारी क्षेत्र की दिग्गज कोयला कंपनी कोल इंडिया की सहायक इकाई भारत कोकिंग कोल लिमिटेड (बीसीसीएल) का प्रारंभिक सार्वजनिक निर्गम (आईपीओ) शुक्रवार को निवेश के लिए खुलते ही निवेशकों के बीच आकर्षण का केंद्र बन गया। आईपीओ खुलने के महज 30 मिनट के भीतर ही इसे पूरी तरह सब्सक्राइब कर लिया गया।
बीसीसीएल का यह निर्गम वर्ष 2026 का पहला मेन बोर्ड आईपीओ माना जा रहा है, जिसके तहत कुल 1,071 करोड़ रुपये जुटाने का लक्ष्य रखा गया है। निवेशक इस आईपीओ में 13 जनवरी तक आवेदन कर सकते हैं।
ग्रे मार्केट पर नजर रखने वाली रिपोर्ट्स के अनुसार, दोपहर तक इसका ग्रे मार्केट प्रीमियम लगभग 9.4 रुपये दर्ज किया गया, जबकि अधिकतम जीएमपी 16.25 रुपये तक पहुंचा। इन संकेतों के आधार पर शेयरों की लिस्टिंग करीब 32 रुपये के आसपास हो सकती है, जिससे निवेशकों को लगभग 40 प्रतिशत तक का संभावित लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
आईपीओ खुलने के शुरुआती घंटों में ही 34.69 करोड़ शेयरों के मुकाबले करीब 38.9 करोड़ शेयरों के लिए बोलियां प्राप्त हुईं। गैर-संस्थागत निवेशकों की श्रेणी में लगभग दो गुना और खुदरा निवेशकों की श्रेणी में डेढ़ गुना से अधिक सब्सक्रिप्शन देखा गया।
यह पूरा निर्गम कोल इंडिया द्वारा ऑफर फॉर सेल के जरिए लाया गया है, जिसके पास बीसीसीएल की शत-प्रतिशत हिस्सेदारी है। शेयर का प्राइस बैंड 21 से 23 रुपये प्रति शेयर तय किया गया है।
आईपीओ से पहले कंपनी ने एंकर निवेशकों से 273 करोड़ रुपये जुटाए थे, जिसके तहत उन्हें 23 रुपये प्रति शेयर की दर से लगभग 11.87 करोड़ शेयर आवंटित किए गए। इस निर्गम में 50 प्रतिशत हिस्सा योग्य संस्थागत खरीदारों, 35 प्रतिशत गैर-संस्थागत निवेशकों और 15 प्रतिशत खुदरा निवेशकों के लिए आरक्षित है।
विशेषज्ञों का मानना है कि कंपनी की मजबूत बाजार स्थिति और कोकिंग कोल उत्पादन में उसकी अग्रणी भूमिका के कारण लिस्टिंग के समय अच्छा रिटर्न मिल सकता है। वित्त वर्ष 2024-25 में देश के कुल घरेलू कोकिंग कोल उत्पादन में बीसीसीएल की हिस्सेदारी करीब 58.5 प्रतिशत रही है।
1972 में स्थापित बीसीसीएल को मिनी रत्न का दर्जा प्राप्त है। भारत में इसकी कोई प्रत्यक्ष सूचीबद्ध प्रतिस्पर्धी कंपनी नहीं है, इसलिए वैश्विक स्तर पर इसकी तुलना कुछ विदेशी कोयला उत्पादक कंपनियों से की जाती है।

