कोलकाता। पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता में गुरुवार को प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पीएसी) के साल्टलेक सेक्टर-वी स्थित कार्यालय और उसके निदेशक प्रतीक जैन के आवास पर छापेमारी की। इस कार्रवाई की जानकारी मिलते ही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं प्रतीक जैन के घर पहुंचीं। कोलकाता के पुलिस आयुक्त मनोज वर्मा भी मौके पर मौजूद रहे।
जानकारी के अनुसार, आई-पीएसी एक राजनीतिक परामर्श संस्था है, जो वर्ष 2019 से तृणमूल कांग्रेस के लिए काम कर रही है। ईडी की विशेष टीम दिल्ली से कोलकाता पहुंची थी और इसी टीम ने छापेमारी को अंजाम दिया। ईडी अधिकारियों ने प्रतीक जैन के लाउडन स्ट्रीट स्थित आवास पर भी तलाशी ली। प्रतीक जैन आई-पीएसी के सह-संस्थापक और वर्तमान निदेशक हैं।
ईडी सूत्रों का कहना है कि यह कार्रवाई दिल्ली में दर्ज पुराने कोल स्मगलिंग मामले से जुड़ी हुई है। जांच के दौरान कुछ लेन-देन में आई-पीएसी का नाम सामने आने के बाद यह छापेमारी की गई। इसी मामले में ईडी की एक अन्य टीम ने उत्तरी कोलकाता के पोस्टा इलाके में एक व्यवसायी के घर पर भी तलाशी ली।
छापेमारी के दौरान केंद्रीय सुरक्षा बलों की तैनाती की गई थी। अचानक हुई इस कार्रवाई से आई-पीएसी के कर्मचारियों में हलचल मच गई। बताया गया कि सुबह के समय जब छापेमारी शुरू हुई, उस वक्त कार्यालय में केवल नाइट शिफ्ट के कुछ कर्मचारी ही मौजूद थे। सेक्टर-वी स्थित 11वीं मंजिल पर मौजूद आई-पीएसी कार्यालय को पूरी तरह सील कर दिया गया, जिससे किसी का आना-जाना रोक दिया गया।
दिन बढ़ने के साथ आई-पीएसी के वरिष्ठ अधिकारी अपने-अपने घरों से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए बैठकों में शामिल होते रहे। राज्य के विभिन्न जिलों में तैनात टीम सदस्यों के साथ भी ऑनलाइन मीटिंग की गई।
आई-पीएसी की स्थापना वर्ष 2014 में प्रशांत किशोर ने की थी। 2019 के लोकसभा चुनाव के बाद से यह संस्था तृणमूल कांग्रेस और पश्चिम बंगाल सरकार के साथ काम कर रही है। 2021 के विधानसभा चुनाव में तृणमूल कांग्रेस की जीत में आई-पीएसी की अहम भूमिका मानी जाती है और 2024 के लोकसभा चुनाव में भी संगठन सक्रिय रहा।
प्रशांत किशोर के संगठन छोड़कर सक्रिय राजनीति में आने के बाद आई-पीएसी की जिम्मेदारी अब तीन निदेशकों—प्रतीक जैन, विनेश चंदेल और ऋषि राज सिंह—के पास है। इनमें प्रतीक जैन पार्टी और संगठन के बीच मुख्य समन्वयक की भूमिका निभाते रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि तृणमूल कांग्रेस के ऑल इंडिया जनरल सेक्रेटरी और डायमंड हार्बर से सांसद अभिषेक बनर्जी से भी कोल स्मगलिंग मामले में केंद्रीय एजेंसियां पहले कई बार पूछताछ कर चुकी हैं। ईडी की यह छापेमारी ऐसे समय हुई है, जब राज्य में आगामी विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो चुकी हैं।
राजनीतिक गलियारों में प्रतीक जैन को प्रभावशाली रणनीतिकार माना जाता है। वे कई बार मुख्यमंत्री ममता बनर्जी से नबन्ना में मुलाकात कर चुके हैं और चुनावी रणनीति के साथ-साथ पार्टी, सरकार और संगठन के बीच समन्वय की अहम भूमिका निभाते रहे हैं।

