मध्य प्रदेश के इंदौर स्थित भागीरथपुरा क्षेत्र में दूषित पानी से जुड़ी त्रासदी गंभीर रूप लेती जा रही है। ताजा जानकारी के अनुसार इस मामले में अब तक 18 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। प्रशासन ने 15 मृतकों के परिजनों को मुआवजा राशि प्रदान कर दी है, जबकि शेष परिवारों को भी जल्द सहायता दी जाएगी।
इंदौर कलेक्टर शिवम वर्मा ने बताया कि सामने आए सभी पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद देने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। उन्होंने कहा कि जिन तीन मामलों में अभी बैंक खाते की औपचारिकताएं पूरी नहीं हुई हैं, उन्हें भी खाता खुलवाकर मुआवजा दिया जाएगा। प्रशासन का प्रयास है कि किसी भी परिवार को सहायता के लिए इंतजार न करना पड़े।
कलेक्टर के अनुसार, मौतों के कारणों को लेकर मेडिकल रिपोर्ट्स का सत्यापन किया जा रहा है और कुछ रिपोर्ट अभी आनी बाकी हैं, जिसके बाद स्थिति और स्पष्ट होगी। वहीं मुख्यमंत्री मोहन यादव ने पहले ही प्रत्येक मृतक के परिजन को दो-दो लाख रुपये मुआवजा देने की घोषणा की थी।
प्रशासन का कहना है कि डॉक्टरों की विशेष टीम हर मामले की जांच कर रही है ताकि मौतों की वास्तविक वजह सामने आ सके। अधिकारियों का यह भी कहना है कि इस समय प्राथमिकता पीड़ित परिवारों को राहत पहुंचाने की है, न कि तकनीकी प्रक्रियाओं में उलझने की।
गौरतलब है कि शुरुआत में प्रशासन ने भागीरथपुरा में केवल चार मौतों की पुष्टि की थी, लेकिन जांच और रिपोर्ट सामने आने के बाद यह संख्या बढ़कर 18 हो गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्च न्यायालय की इंदौर खंडपीठ ने दो अधिकारियों को कारण बताओ नोटिस जारी किया है।
इसके बाद राज्य सरकार ने भी सख्त रुख अपनाते हुए तीन अधिकारियों पर कार्रवाई की है और पूरे मामले की जांच के लिए एक समिति का गठन किया गया है। वहीं विपक्षी दल इस मुद्दे को लेकर सरकार और नगर निगम पर सवाल उठा रहे हैं।
इस बीच कलेक्टर शिवम वर्मा ने भागीरथपुरा का दौरा कर नई पाइपलाइन बिछाने के कार्य का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि जल प्रदूषण को नियंत्रित करने के लिए लगातार सर्वे, सफाई अभियान और पानी के सैंपल की जांच की जा रही है, ताकि हालात को जल्द सामान्य किया जा सके।

