उषा मार्टिन पहल से महिलाएँ बनीं आत्मनिर्भर, मशरूम की खेती से मिली अच्छी कमाई

Shashi Bhushan Kumar

महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उषा मार्टिन फाउंडेशन की पहल सामने आई है। ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और स्वरोजगार के अवसर देने के उद्देश्य से फाउंडेशन ने मशरूम उत्पादन प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाया। इसके तहत 60 महिला समूहों को ऑयस्टर मशरूम की वैज्ञानिक खेती का प्रशिक्षण दिया गया।

फाउंडेशन के सचिव डॉ. मयंक मुरारी ने बताया कि प्रशिक्षण के बाद महिलाओं ने अपने घरों पर ही मशरूम की खेती शुरू की। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं को पूरी प्रक्रिया—पुआल और भूसा तैयार करना, उबाल प्रक्रिया, स्पॉन डालना, बैग भरना, नमी और तापमान नियंत्रित करना, कटाई और भंडारण—के बारे में सिखाया गया।

इस प्रशिक्षण में कुल 1159 किलोग्राम ऑयस्टर मशरूम का उत्पादन हुआ, जिसे स्थानीय बाजार में बेचकर महिलाओं ने ₹2,31,800 की आमदनी अर्जित की। यह आय समूह की महिलाओं में साझा की गई। डॉ. मुरारी ने कहा कि भविष्य में भी इस तरह के आजीविका और कौशल विकास कार्यक्रम चलाए जाएंगे।


अनगड़ा प्रखंड के मनीराम महतो पिछले तीन साल से मशरूम की खेती कर रहे हैं। उन्होंने 2025 में 48 हजार रुपये की आमदनी अर्जित की। मनीराम बताते हैं कि मशरूम की खेती “एटीएम मशीन” की तरह है—जब चाहो, पैसा कमाओ।

हेसल की लाखो देवी ने 2025 में 40 किलो मशरूम बेचकर 8,000 रुपये और 2024 में 51 किलो बेचकर 10,000 रुपये की आमदनी प्राप्त की। मासू गांव के मुल्लू महतो पिछले चार साल से मशरूम की खेती कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि यह खेती सबसे सरल और लाभकारी आय का माध्यम है।

उषा मार्टिन फाउंडेशन की यह पहल ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और आर्थिक स्थिति मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित हो रही है।

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