बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री बेगम खालिदा जिया का निधन, देश में शोक की लहर

Ravikant Upadhyay

ढाका। बांग्लादेश से एक बेहद दुखद समाचार सामने आया है। देश की पूर्व और पहली महिला प्रधानमंत्री तथा बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) की चेयरपर्सन बेगम खालिदा जिया का मंगलवार की सुबह निधन हो गया। वह लंबे समय से गंभीर बीमारी से जूझ रही थीं और राजधानी ढाका के एवरकेयर हॉस्पिटल में उनका इलाज चल रहा था, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर मिलते ही बांग्लादेश की राजनीति और समाज में शोक की लहर दौड़ गई।

बेगम खालिदा जिया बांग्लादेश की राजनीति की एक मजबूत और प्रभावशाली शख्सियत रही हैं। उन्होंने दो बार देश के प्रधानमंत्री पद की जिम्मेदारी संभाली और कई दशकों तक राजनीति के केंद्र में बनी रहीं। उनके नेतृत्व में बीएनपी बांग्लादेश की प्रमुख राजनीतिक ताकतों में से एक रही है। उनके निधन को न सिर्फ बीएनपी बल्कि पूरे देश के लिए एक बड़ी राजनीतिक क्षति के रूप में देखा जा रहा है।

खास बात यह है कि खालिदा जिया का निधन ऐसे समय पर हुआ है, जब देश में आम चुनाव की सरगर्मियां तेज थीं। बांग्लादेश में फरवरी महीने में राष्ट्रीय संसदीय चुनाव प्रस्तावित हैं। चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने की अंतिम तिथि सोमवार को थी और इसी दिन खालिदा जिया ने आगामी चुनाव के लिए नामांकन पत्र दाखिल कराया था। उन्होंने तीन अलग-अलग संसदीय सीटों से चुनाव लड़ने के लिए पर्चे भरे थे। हालांकि, उनकी खराब स्वास्थ्य स्थिति के चलते नामांकन उनके प्रतिनिधियों के माध्यम से किया गया था।

बीएनपी के कार्यकारी चेयरमैन और खालिदा जिया के पुत्र तारिक रहमान ने भी दो सीटों से नामांकन पत्र दाखिल किए थे। पार्टी की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 13वें राष्ट्रीय संसदीय चुनाव के लिए खालिदा जिया और तारिक रहमान की ओर से कुल पांच सीटों पर नामांकन दाखिल किए गए थे। सोमवार को नामांकन प्रक्रिया के अंतिम दिन खालिदा जिया के प्रतिनिधियों ने संबंधित रिटर्निंग अधिकारियों के कार्यालय में सभी दस्तावेज जमा कराए थे।

खालिदा जिया के अचानक निधन से देश की चुनावी राजनीति में नए समीकरण बनने की अटकलें तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बीएनपी के नेतृत्व और चुनावी रणनीति पर इसका गहरा असर पड़ सकता है। वहीं, समर्थकों और पार्टी कार्यकर्ताओं में शोक के साथ-साथ अनिश्चितता का माहौल भी देखा जा रहा है।

उनके निधन पर विभिन्न राजनीतिक दलों, नेताओं और सामाजिक संगठनों ने गहरा दुख व्यक्त किया है। कई नेताओं ने उन्हें बांग्लादेश की लोकतांत्रिक राजनीति का अहम स्तंभ बताते हुए श्रद्धांजलि अर्पित की। राजधानी ढाका सहित देश के कई हिस्सों में बीएनपी समर्थक शोक में डूबे नजर आए।

बेगम खालिदा जिया का जाना बांग्लादेश की राजनीति के एक युग के अंत के रूप में देखा जा रहा है। उनका राजनीतिक सफर, संघर्ष और योगदान लंबे समय तक याद किया जाएगा।

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