JMM प्रवक्ता मनोज पांडे ने PESA कानून लागू होने को बताया आदिवासी समुदाय की जीत

Ravikant Upadhyay

झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के केंद्रीय प्रवक्ता मनोज पांडे ने पेसा (Panchayat Extension to Scheduled Areas) कानून के लागू होने को आदिवासी समुदाय की बड़ी जीत बताया। उन्होंने कहा कि यह कानून लंबे समय से आदिवासियों के अधिकारों और विकास को सुनिश्चित करने के लिए जरूरी था, और झामुमो ने इसके लिए सड़क से सदन तक लगातार आवाज़ उठाई।

मनोज पांडे ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि आदिवासी समुदाय के हित में पेसा कानून को लागू करना हमारी लगातार मांग और संघर्ष का परिणाम है। उन्होंने मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का विशेष रूप से धन्यवाद किया और कहा कि इस कदम से अब आदिवासियों के विरुद्ध होने वाले अपराधों पर नियंत्रण मिलेगा और स्थानीय स्तर पर विकास को गति मिलेगी।

उन्होंने बताया कि पेसा कानून के तहत एक एकड़ से कम वाले जल क्षेत्रों पर ग्राम सभा का नियंत्रण होगा। इस क्षेत्र से निकली मछली के उपयोग का अधिकार ग्राम सभा को मिलेगा। इसके अलावा, घरों में चोरी, मवेशी चोरी और सामान्य अपराधों की सुनवाई का अधिकार भी ग्राम सभा को मिलेगा। शराब की दुकान खोलने के लिए ग्राम सभा की अनुमति अनिवार्य होगी। ये सभी प्रावधान आदिवासी समुदाय के अधिकारों की सुरक्षा और स्थानीय विकास को ध्यान में रखते हुए बनाए गए हैं।

मनोज पांडे ने इसके अलावा राजनीतिक मामलों पर भी अपनी राय रखी। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सांसद प्रियंका गांधी वाड्रा और राहुल गांधी दोनों में प्रधानमंत्री बनने की क्षमता है, लेकिन यह कांग्रेस का आंतरिक मामला है कि किसे उम्मीदवार बनाया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के विदेश दौरे पर सवाल उठाना अनुचित है, क्योंकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के विदेश दौरे पर भी कोई सवाल नहीं उठाया जाता।

केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मनोज पांडे ने कहा कि धर्मनिरपेक्षता की व्याख्या हमारे संविधान में स्पष्ट रूप से की गई है और ऐसी स्थिति में किसी को भी इस पर टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है। केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह के बयान पर उन्होंने कहा कि भाजपा को अपनी स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए और किसी तरह की अपुष्ट टिप्पणी से बचना चाहिए।

मनोज पांडे ने बांग्लादेश में हिंदुओं पर हुए हमलों की निंदा करते हुए केंद्र सरकार से इस संबंध में स्पष्ट रुख अपनाने और ठोस कदम उठाने की मांग की। उन्होंने कहा कि यह अंतरराष्ट्रीय मुद्दा है और इसके प्रति सरकार की जिम्मेदारी सुनिश्चित करनी चाहिए।

इस प्रकार, पेसा कानून का लागू होना आदिवासी समाज के अधिकारों और स्थानीय शासन को सशक्त बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। झामुमो प्रवक्ता मनोज पांडे ने इसे आदिवासियों की जीत बताया और कहा कि अब यह सुनिश्चित करना राज्य सरकार की जिम्मेदारी होगी कि कानून का सही क्रियान्वयन हो और स्थानीय विकास में इसका प्रभाव नजर आए।

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